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बरेली: अनियंत्रित स्कूल बस पेड़ से टकराई, 13 बच्चे घायल; स्कूल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप।

बरेली: अनियंत्रित स्कूल बस पेड़ से टकराई, 13 बच्चे घायल; स्कूल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप।

संवाददाता, मोहम्मद वसीम 

बरेली। बरेली के भोजीपुरा क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यू इंग्लैंड डिकोनस स्कूल की एक जर्जर बस जटऊ पट्टी गांव के पास लिंक मार्ग पर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से जा टकराई। दुर्घटना के वक्त ब‌स में कुल 31 छात्र-छात्राएं सवार थे, जिनमें से 13 बच्चे घायल हो गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुबह करीब साढ़े छह बजे तेज रफ्तार बस अचानक अपना संतुलन खो बैठी और सीधे पेड़ से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस में चीख-पुकार मच गई। आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू करते हुए बच्चों को बाहर निकाला। सूचना मिलते ही पुलिस और परिजन भी मौके पर पहुंच गए। सभी घायल बच्चों को तुरंत इलाज के लिए राममूर्ति मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। आक्रोशित अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना था कि बस की हालत लंबे समय से बेहद जर्जर थी और उसकी फिटनेस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा था।

गुस्साए अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के वक्त बस को एक नाबालिग चालक चला रहा था। परिजनों का दावा है कि इस बारे में स्कूल प्रशासन से पहले भी कई बार शिकायत की गई थी, लेकिन हर बार उनकी अनदेखी की गई। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि एक गंभीर आपराधिक मामला बनता है।

इस हृदयविदारक घटना के बाद से क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, परिवहन और शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि बिना फिटनेस और सुरक्षा मानकों की जांच के ऐसी जर्जर बसें सड़कों पर कैसे दौड़ रही थीं।

हादसे में घायल हुए बच्चों में बसिम राजा (कक्षा 8), अक्सी नूर (कक्षा 4), अबुसर (एनसी), असलान (कक्षा 2), आकिब (कक्षा 2), मोहम्मद आशिफ, मोहम्मद असलम और आशिफ राजा सहित अन्य छात्र शामिल हैं। ये सभी बच्चे भोजीपुरा क्षेत्र के आसपास के गांवों के रहने वाले हैं।

यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर स्कूल बसों की फिटनेस, ड्राइवरों के लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी कौन करेगा। समय रहते यदि शिकायतों पर गौर किया जाता, तो शायद यह बड़ा हादसा टल सकता था। फिलहाल, सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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