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संपादकीय

करियर की अंधी दौड़ में कहीं छूट तो नहीं रहा पारिवारिक जीवन? – कुमार सुंदरम्।

करियर की अंधी दौड़ में कहीं छूट तो नहीं रहा पारिवारिक जीवन? – कुमार सुंदरम्। संपादकीय। वर्तमान समय प्रतिस्पर्धा, महत्वाकांक्षा और उपलब्धियों का युग है। युवा वर्ग उच्च शिक्षा, सरकारी एवं निजी नौकरियों में पदोन्नति, व्यवसाय के विस्तार तथा आर्थिक समृद्धि के लिए निरंतर प्रयासरत है। सफलता प्राप्त करना प्रत्येक …

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संपादकीय : “शिक्षक – समाज की रीढ़”

संपादकीय : “शिक्षक – समाज की रीढ़” संपादकीय। आज जब हम शिक्षक दिवस मना रहे हैं, तो यह अवसर केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं बल्कि आत्ममंथन का क्षण भी है। शिक्षक केवल कक्षा की चारदीवारी तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे पूरे समाज के भविष्य का निर्माण करते हैं। उनका कार्य …

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