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बदायूँ: लाखों खर्च कर बने पंचायत भवन बने ‘शोपीस’, घरों से चल रही है ‘गांव की सरकार’। 

बदायूँ: लाखों खर्च कर बने पंचायत भवन बने ‘शोपीस’, घरों से चल रही है ‘गांव की सरकार’। 

संवाददाता, शैलेन्द्र सिंह 

बदायूँ। सरकार द्वारा ग्रामीण विकास और जनता को एक छत के नीचे सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से बनाए गए पंचायत भवन आज उपेक्षा के शिकार हो गए हैं। जिले की समरेर ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत मौसमपुर में स्थिति कुछ ऐसी ही है, जहाँ पंचायत भवन के मुख्य द्वार पर अक्सर ताले लटके रहते हैं। विभागीय अधिकारियों की कथित उदासीनता के चलते करोड़ों रुपये की लागत से तैयार ये भवन ग्रामीणों के किसी काम नहीं आ रहे हैं और गांव की सरकार घरों से चलाई जा रही है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने पंचायत भवनों के निर्माण पर 15 से 20 लाख रुपये तक की भारी धनराशि खर्च की है, ताकि उन्हें जरूरी सरकारी कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। इन भवनों के बेहतर संचालन के लिए पंचायत सहायकों की नियुक्ति भी की गई है, लेकिन धरातल पर हकीकत बिल्कुल उलट है। भवन खुलने के बजाय बंद रहते हैं, जिससे ग्रामीणों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आय-जाति प्रमाण पत्र जैसे छोटे-मोटे कार्यों के लिए भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

पंचायत भवन में कामकाज संचालित न होने के कारण ग्रामीणों को बेहद मायूसी है। जानकारों का मानना है कि यदि संबंधित अधिकारी समय-समय पर पंचायत भवनों की मॉनिटरिंग करें और जवाबदेही तय करें, तो ही इनका लाभ आम जनता तक पहुँच पाएगा। फिलहाल, स्थिति यह है कि पंचायत भवन केवल कागजों में ही संचालित हो रहे हैं और उनका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है।

 

 

 

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