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थाना सादुल्लानगर की जमीन से अवैध मजार हटाई गई, 12 साल बाद कब्जा मुक्त—राजस्व–पुलिस की संयुक्त कार्रवाई।

थाना सादुल्लानगर की जमीन से अवैध मजार हटाई गई, 12 साल बाद कब्जा मुक्त—राजस्व–पुलिस की संयुक्त कार्रवाई।

गुलाम नबी कुरैशी 

बलरामपुर। थाना सादुल्लानगर परिसर की सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की। राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने वर्षों से खड़ी अवैध मजार को बुलडोजर से ध्वस्त कर उसका मलबा पास के सरकारी तालाब में दफन करा दिया। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई, क्योंकि यह भूमि पिछले 12 वर्षों से कब्जे और विवाद का विषय रही थी।

2013 में शुरू हुआ विवाद।

थाना सादुल्लानगर की गाटा संख्या 696, रकबा 2.16 एकड़ जमीन राजस्व अभिलेखों में थाने की भूमि के रूप में दर्ज है। वर्ष 2013 में पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी पर आरोप लगा कि उन्होंने अपने भाई मारूफ अनवर हाशमी को मजार का प्रबंधक बनाकर लगभग 0.18 एकड़ थाने की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से ‘मजार शरीफ बाबा सहीदे मिल्लत अब्दुल कुद्दूश शाह रह.’ के नाम दर्ज करा लिया। इसके बाद यहां मजार का निर्माण भी करा दिया गया।

थाना प्रशासन की पैरवी में एसडीएम कोर्ट का आदेश।

मामले का खुलासा होने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष की ओर से मुकदमा पंजीकृत कर दस्तावेजों की जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर उपजिलाधिकारी उतरौला ने 19 मार्च 2024 को बड़ा आदेश जारी करते हुए फर्जी अभिलेख निरस्त कर जमीन को पुनः थाने की संपत्ति घोषित कर दिया।

इस फर्जीवाड़े के मामले में पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी, मारूफ अनवर हाशमी सहित अन्य लोगों के विरुद्ध धारा 420, 467, 468, 471, 120बी भादवि तथा 2/3 गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया।

वाद आयुक्त ने भी खारिज किया दावा।

एसडीएम कोर्ट के निर्णय के बाद मजार प्रबंधन की ओर से देवीपाटन मंडल के वाद आयुक्त न्यायालय में अपील दायर की गई, जिसे 28 नवंबर 2025 को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया गया। साथ ही पूर्व में जारी स्थगन/निगरानी आदेश समाप्त कर फाइल वापस तहसील को भेज दी गई। इससे प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया।

तहसीलदार का बेदखली आदेश—दो दिन का नोटिस।

थाना प्रशासन ने अवैध निर्माण हटाने हेतु तहसीलदार उतरौला को पत्र लिखा। इसके आधार पर तहसीलदार ने 28 नवंबर 2025 को बेदखली व क्षतिपूर्ति का आदेश जारी कर कब्जेदारों को दो दिन की मोहलत दी, लेकिन निर्धारित अवधि में कोई अनुपालन नहीं किया गया।

1 दिसंबर को चला बुलडोजर, कब्जा मुक्त।

मोहलत समाप्त होने के बाद सोमवार सुबह राजस्व टीम, पुलिस बल और अधिकारियों की मौजूदगी में अवैध मजार को बुलडोजर से ढहाकर मलबे को सरकारी तालाब में दफन कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

प्रशासन सख्त—सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा नहीं होने दिया जाएगा।

करीब 12 वर्षों से विवादित पड़ी यह सरकारी जमीन अब पूरी तरह कब्जा मुक्त हो चुकी है। प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे के मामलों में शून्य सहनशीलता नीति पर काम किया जाएगा और ऐसे निर्माण तत्काल हटाए जाएंगे।

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