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वजीरगंज में श्राद्ध अवसर पर विकलांग बच्चों को भोजन, सेवा और मानवता का संदेश।

वजीरगंज में श्राद्ध अवसर पर विकलांग बच्चों को भोजन, सेवा और मानवता का संदेश।

वजीरगंज (बदायूं)। श्राद्ध पक्ष के अवसर पर वजीरगंज स्थित विकलांग आश्रम में भावनात्मक और प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला। बदायूं जिले के समाजसेवी मुकुल सक्सेना ने अपने माता-पिता श्रीमती कमलेश सक्सेना एवं नरेंद्र स्वरूप सक्सेना की पुण्य स्मृति में आश्रम के दिव्यांग व बेसहारा बच्चों को भोजन कराकर उन्हें स्नेह और अपनत्व का अहसास कराया।

श्राद्ध अनुष्ठान का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस कर्मकांड के माध्यम से अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्रद्धांजलि दी जाती है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस परंपरा को जीवंत करते हुए मुकुल सक्सेना ने कहा कि – “पूर्वजों की सच्ची याद तभी सार्थक होती है जब हम समाज के उन वर्गों की मदद करें जिन्हें वास्तव में सहयोग की आवश्यकता है। बेसहारा बच्चों की सेवा करना ही मेरे लिए सच्ची श्रद्धांजलि है।”

भोजन वितरण कार्यक्रम में बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और संतोष स्पष्ट दिखाई दिया। कई बच्चों ने प्रसाद पाकर खुशी का इजहार भी किया। यह दृश्य उपस्थित लोगों के लिए बेहद भावुक कर देने वाला था।

आश्रम के अध्यक्ष उनीश पाल सिंह ने इस अवसर पर कहा कि दान का वास्तविक स्वरूप वही है जो किसी जरूरतमंद के काम आए। उन्होंने समाज के सक्षम लोगों से अपील की कि वे आगे आकर ऐसे बच्चों की मदद करें। वहीं आश्रम प्रभारी सुनीरा सिंह गौर ने कहा – “हमारा आश्रम समाज के दानदाताओं की मदद से संचालित हो रहा है। जब भी कोई दानदाता बच्चों को सहारा देता है, तो हमारे हौसले और भी मजबूत हो जाते हैं।”

इस मौके पर आश्रम से जुड़े चंचल यादव, आकाश कुमार, सर्वेश उपाध्याय, विनोद कुमार भारती, राजेश कुमार, आशु भाई, दीपक पाल सहित अनेक स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने मुकुल सक्सेना के इस पुनीत कार्य की सराहना की और इसे अनुकरणीय बताया।

श्राद्ध पक्ष में किए गए इस आयोजन ने न केवल पूर्वजों की आत्मा की शांति के संदेश को प्रकट किया, बल्कि समाज को यह भी प्रेरणा दी कि सेवा और दान ही सबसे बड़ा धर्म है।

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