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लखीमपुर दशहरा मेले की सातवीं शाम: जवाबी कव्वाली में गूंज उठी गंगा-जमुनी सरगम।

लखीमपुर दशहरा मेले की सातवीं शाम: जवाबी कव्वाली में गूंज उठी गंगा-जमुनी सरगम।

मोहम्मद असलम, संवाददाता 

लखीमपुर खीरी। लखीमपुर खीरी के प्राचीन दशहरा मेले में सांस्कृतिक उमंग और सामाजिक सद्भाव की झलक सातवें दिन देखने को मिली। करवा चौथ के पावन अवसर पर आयोजित जवाबी कव्वाली ने दर्शकों के दिलों में प्रेम, एकता और भाईचारे की लौ जगा दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता पालिकाध्यक्षा डॉ. इरा श्रीवास्तव ने की, जबकि संचालन समाजसेवी-साहित्यकार राममोहन गुप्त ने संभाला। मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री हाजी आर.एस. उस्मानी ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और कहा कि गंगा-जमुनी तहज़ीब की यह शाम लखीमपुर की पहचान है और यह मंच वाकई लाजवाब है।

जवाबी कव्वाली के दौरान बरेली के मशहूर कव्वाल साबिर चिश्ती ने सुरों में लपेटकर कहा, “जिसे मुस्तफ़ा से मोहब्बत नहीं है, क़ुबूल उसकी कोई इबादत नहीं है।” श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। वहीं कव्वाला मुस्कान बरेली ने अपने अल्फ़ाज़ों में समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बहती है प्रेम की गंगा बहने दो, क्यों करते हो देश में दंगा रहने दो और जब भी मेरी कहानी लिखना, मुझे हिन्दुस्तानी लिखना। उन्होंने अंतिम बंद में कहा कि हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सबका एक ही नारा है, ये भारत देश हमारा है। उनके इस संदेश पर पूरा पंडाल भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा।

इस कव्वाली कार्यक्रम का संयोजन राशिद खान, बरकत अली, शमशुल हसन, निगार अली और तमसीन बानो ने किया। उद्घाटन सत्र में अब्दुल मन्नान अंसारी, जमील अहमद, शफीक अहमद, तारिक, राजेन्द्र अजमानी, शिव तोलानी और मयंक नागर को पालिका परिषद द्वारा विशेष सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम में अधिशासी अधिकारी संजय कुमार, मेलाधिकारी सामरा सईद, मेलाध्यक्ष कौशल तिवारी, इंजीनियर दुर्गेश वर्मा, देवाशीष मुखर्जी, विजय गुप्ता, अनिल गुप्ता, मोहित शुक्ला, बाबूलाल, प्रह्लाद, इशू सहित बड़ी संख्या में जनसमुदाय उपस्थित रहा।

यह कव्वाली की शाम सिर्फ सुरों का संगम नहीं थी, बल्कि सांस्कृतिक एकता, सौहार्द और भारतीयता के अमिट भावों का उत्सव बनकर दर्शकों के हृदयों में बस गई।

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