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दहेज विवाद में टूटी शादी, बारात लौटते ही दुल्हन की खुशियां रह गईं अधूरी।

दहेज विवाद में टूटी शादी, बारात लौटते ही दुल्हन की खुशियां रह गईं अधूरी।

बदायूं। बदायूँ के काशीराम आवास कॉलोनी में दहेज विवाद ने एक गरीब परिवार की खुशियां छीन लीं। मजदूरी करने वाले एक मुस्लिम परिवार की बेटी की शादी की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, लेकिन वर पक्ष द्वारा अतिरिक्त दहेज की मांग करने के कारण बारात घर तक नहीं पहुंच सकी और दुल्हन का निकाह अधूरा रह गया।

शादी की तैयारियां पूरी, लेकिन खुशियां अधूरी रह गईं।

जानकारी के अनुसार, दुल्हन के हाथों पर मेहंदी सज चुकी थी और हलवाई बारातियों के लिए पकवान तैयार कर चुके थे। शादी उझानी के पठान टोला से होने वाली थी। शादी के दिन सुबह ही दूल्हे के पिता ने बधू पक्ष से 6 लाख रुपये नगद और एक बुलेट मोटरसाइकिल की मांग रख दी। बधू पक्ष ने पहले की मांग पूरी कर दी थी और अन्य सामान भी दे दिया था।

लेकिन नई मांग पूरी न होने पर दूल्हा घर से चला गया। इससे दुल्हन और उसके परिवार की खुशियां पल भर में धूमिल हो गईं। बारात लौटने की सूचना मिलते ही पूरे मोहल्ले में सन्नाटा और शोक का माहौल छा गया।

परिवार और रिश्तेदारों में मायूसी।

बधू पक्ष का कहना है कि यह घटना उनके लिए एक बड़ा सदमा है। परिवार और रिश्तेदारों ने बताया कि शादी की सारी तैयारियां पूरे उत्साह और उम्मीद के साथ की गई थीं। दुल्हन के माता-पिता ने बताया कि उनकी बेटी की सारी खुशियां बारात के लौटने के साथ ही खत्म हो गईं। स्थानीय लोग भी इस घटना पर गहरा दुख प्रकट कर रहे हैं और कहते हैं कि दहेज प्रथा गरीब और सामान्य परिवारों के लिए कई बार दुख और असमंजस लेकर आती है।

सामाजिक और नैतिक दृष्टि से गंभीर मामला।

स्थानीय लोग और समाजसेवी कहते हैं कि दहेज प्रथा के कारण कई परिवारों की खुशियां अधूरी रह जाती हैं। इस घटना ने एक बार फिर से यह सवाल उठाया है कि सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों पर दहेज प्रथा का कितना नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बधू पक्ष ने कहा कि वे इस घटना से गहरे आहत हैं और समाज से अपील करते हैं कि दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि किसी और परिवार को इस तरह का दुख न झेलना पड़े।

इस घटना ने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। पड़ोसी और रिश्तेदार इसे एक गंभीर सामाजिक समस्या मानते हैं और आशा जताते हैं कि सरकार और समाज मिलकर इस प्रथा के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाएं।

बाइट– रेहान (शादी तय करवाने वाला)

बाइट– लड़की के पिता

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