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ज्ञान यज्ञ महोत्सव में मानवता और नैतिकता का संदेश, संत जियर स्वामी ने सुनाई प्रह्लाद की कथा।

ज्ञान यज्ञ महोत्सव में मानवता और नैतिकता का संदेश, संत जियर स्वामी ने सुनाई प्रह्लाद की कथा।

चहनियां, चंदौली। पक्खोपुर गांव में आयोजित सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को आयोजित प्रवचन में संत लक्ष्मी प्रपन्न जियर स्वामी ने मानवता, नैतिकता और भक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य के भीतर मानवता और नैतिकता का भाव जागृत हो जाता है, तब उसका व्यक्तित्व और अधिक महान बन जाता है।

संत जियर स्वामी ने प्रह्लाद की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रह्लाद भले ही दैत्य कुल में जन्मे थे, लेकिन उनके भीतर भगवान के प्रति अटूट भक्ति, उच्च नैतिकता और श्रेष्ठ चरित्र था। यही कारण रहा कि वे देवताओं में भी श्रेष्ठ माने गए। उन्होंने कहा कि सच्चे मन से भक्ति और कर्म में लगे रहने वाला व्यक्ति कभी भी पतन के मार्ग पर नहीं जाता।

उन्होंने बताया कि बाल्यकाल में प्रह्लाद ने असंख्य कष्ट सहे—उन्हें आग में जलाने का प्रयास किया गया, पर्वत से गिराया गया, सर्प से डसवाया गया और जल में डाला गया, लेकिन उनकी आस्था और भक्ति डिगी नहीं। जब अधर्म अपनी सीमा पार कर गया, तब स्वयं भगवान को अवतार लेकर प्रह्लाद की रक्षा करनी पड़ी और अधर्म का अंत हुआ।

संत जियर स्वामी ने कहा कि जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान की भक्ति नहीं छोड़ता, वह जीवन में कभी भी धोखा नहीं खाता। उन्होंने बताया कि भक्ति मार्ग में दूसरे स्थान पर महर्षि नारद को स्थान दिया गया है, जो भक्ति के महान उदाहरण हैं।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और प्रवचन को ध्यानपूर्वक सुना।

राजन सिंह, संवाददाता

सहयोगी: अमित कुमार ओझा

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