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सहसवान: आज़ादी के बाद बनी सड़क अब बनी तालाब: वाल्मीकि बस्ती के 150 परिवार नरकीय जीवन जीने को मजबूर।

आज़ादी के बाद बनी सड़क अब बनी तालाब: वाल्मीकि बस्ती के 150 परिवार नरकीय जीवन जीने को मजबूर।

सहसवान (बदायूँ): सहसवान तहसील के मोहल्ला चौधरी, नीची निन्होर स्थित वाल्मीकि बस्ती में विकास कार्य केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गए हैं। लगभग 150 परिवारों की आबादी वाली यह बस्ती आज मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। निवासियों का कहना है कि आज़ादी के बाद से यहाँ केवल एक बार सड़क का निर्माण हुआ था, जो समय के साथ पूरी तरह टूटकर अब दलदल और तालाब में तब्दील हो चुकी है।

मोहल्लेवासियों का दर्द यह है कि सड़क पर हुए बड़े-बड़े गड्ढों में नालियों का गंदा पानी हर समय भरा रहता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जिससे कीचड़ के बीच से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। स्थानीय निवासी रामवती देवी ने बताया कि इस जलभराव के कारण बच्चे स्कूल जाने में डरते हैं और आए दिन फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। चारों ओर फैली बदबू और गंदगी के कारण डेंगू-मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा हर पल बना रहता है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। समस्या के समाधान के लिए बस्ती के लोगों ने की बार वार्ड सभासद, नगर पालिका ईओ और चेयरमैन को लिखित शिकायतें दीं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। निवासियों का कहना है कि शहर के अन्य इलाकों में सड़क मरम्मत का काम तो नियमित होता है, लेकिन वाल्मीकि बस्ती के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

थक-हारकर अब मोहल्लेवासियों ने उपजिलाधिकारी सहसवान को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जाँच और जल्द से जल्द सड़क निर्माण की मांग की है। निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते सुध नहीं ली, तो वे आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने के लिए विवश होंगे। इस संबंध में नगर पालिका के अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, परंतु उनसे संपर्क नहीं हो सका।

 

 

 

 

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