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खीरी टाउन में ‘बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब’ द्वारा भव्य मुशायरे का आयोजन, इमाम हुसैन को दी खिराज़-ए-अकीदत।

खीरी टाउन में ‘बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब’ द्वारा भव्य मुशायरे का आयोजन, इमाम हुसैन को दी खिराज़-ए-अकीदत।

संवाददाता, मोहम्मद असलम

लखीमपुर खीरी। खीरी टाउन में ‘बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब’ के तत्वावधान में आयोजित मासिक तरही मुशायरे के क्रम में इस माह हज़रत इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) की शान में एक विशेष ‘मनक़बती मुशायरा’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम की सदारत सैयद सलमान अहमद रिज़वी ने की।

मुशायरे का आगाज़ हाफ़िज़ मुस्तफा रज़ा ने कुरआन पाक की तिलावत से किया। इसके बाद मो0 सिकंदर, मो0 हस्सान और वाहिद अहमद वाहिदी ने बारगाह-ए-रिसालत में नात-ए-पाक पेश की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खतीब-ए-अहले बैत सैयद सलमान अहमद रिज़वी ने इमाम हुसैन की शहादत और उनके त्याग पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपना कलाम पेश करते हुए कहा:

“तू तो कब का मिट गया ज़ालिम यज़ीद, आज तक हर दिल के अंदर हैं हुसैन।”

मुशायरे में शिरकत करने वाले अन्य शायरों ने अपने कलाम के ज़रिए इमाम हुसैन की शहादत को याद किया:

शहबाज़ हैरत चिश्ती: “लगा के कर्बोबला की ज़मीन पर खेमे, ज़मी पे खुलद का नक़्शा बना रहे हैं हुसैन।”

डॉ0 एहराज अरमान: “आई न ऐसी शामो-सहर कर्बला के बाद, रोए है ख़ूब शम्स-ओ-क़मर कर्बला के बाद।”

आमिर रज़ा: “नबी का चैन ज़हरा के लाडले तुम हो, सुकूने क़ल्ब ज़माने के वास्ते तुम हो।”

डॉ0 एखलाक़: “नन्हे असगर को अभी दफन किया है फिर भी, अपनी तकदीर पर नाज़ा है हुसैन इब्ने अली।”

हसन अंसारी: “नमो निशां यज़ीद का मिटाया हुसैन ने, सब कुछ लुटा के दीन को बचाया हुसैन ने।”

मुशायरे में नफीस वारसी, मंसूर महवार, नसीम सीतापुरी, उमर हनीफ़ क़ुरैशी, सैफुल इस्लाम, अय्यूब अंसार और इब्बन खां सहित अनेक शायरों ने इमाम हुसैन की शान में मन्क़बतें पढ़कर माहौल को अकीदत से सराबोर कर दिया। देर रात सलातो-सलाम के साथ मुशायरा कामयाबी से संपन्न हुआ।

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