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1857 के अमर शहीदों को सहसवान में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, ‘नमन 1857’ कार्यक्रम में गूंजा देशभक्ति का स्वर।

1857 के अमर शहीदों को सहसवान में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, ‘नमन 1857’ कार्यक्रम में गूंजा देशभक्ति का स्वर।

सहसवान (बदायूँ)। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 के वीर शहीदों और महान स्वतंत्रता सेनानियों की पावन स्मृति में बदायूँ जिले के सहसवान में ‘नमन (सलाम) 1857’ श्रद्धांजलि कार्यक्रम का भव्य और गरिमामयी आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और शान-ए-अवध राजा गौरखपुर खान बहादुर मीर मोहम्मद की याद में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में वक्ताओं ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूतों के बलिदान को याद करते हुए उन्हें अत्यंत श्रद्धापूर्वक श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान पूरा परिसर देशभक्ति के नारों और स्वरों से गुंजायमान हो उठा।

सहसवान के ऐतिहासिक मुहल्ला काज़ी में आयोजित इस कार्यक्रम में 10 मई 1857 को शुरू हुए देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को नमन किया गया। विशेष रूप से स्वाधीनता के अग्रदूत मीर मोहम्मद हसन साहब और उनके छोटे भाई शहीद कप्तान मीर सैय्यद फिदा हुसैन साहब के शौर्य को याद किया गया।

कार्यक्रम के दौरान उनकी पैतृक हवेली परिसर में स्थित कप्तान मीर फिदा हुसैन साहब की पावन दरगाह पर दीप प्रज्वलित कर सभी आगंतुकों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। ज्ञात हो कि बेगम हजरत महल द्वारा गठित अवध आर्मी की विशेष मरीन टुकड़ी के मुखिया कप्तान मीर फिदा हुसैन साहब ही थे। अंग्रेजों की मुखबरी के बाद जब ब्रितानी हुकूमत ने उन्हें घेरा, तो उन्होंने अपनी इसी पुश्तैनी हवेली में अपने जांबाज साथियों सहित वीरतापूर्वक संघर्ष करते हुए देश के लिए अपनी शहादत दे दी थी।

इतिहास के पन्नों को याद करते हुए वक्ताओं ने बताया कि कप्तान मीर फिदा हुसैन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जंग-ए-आजादी लड़ने वाले 19 अन्य देशभक्तों को क्रूर अंग्रेज शासकों ने वर्तमान मंडी समिति सहसवान के सामने स्थित ‘खूनी इमलियों’ के पेड़ों पर सरेआम फांसी दे दी थी और कई सेनानियों को गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया था, जबकि उनके कई अन्य साथियों को कठोर काला पानी की सजा दी गई थी। इस ऐतिहासिक और भावुक अवसर पर मीर मोहम्मद हसन के वंशज मीर मुशर्रफ अली एडवोकेट, शहीद ओमकार बक्काल के वंशज विधान माहेश्वरी तथा काला पानी की कठोर सजा पाने वाले मौलवी विलायत हुसैन के वंशज फखरे आलम को मंच पर माल्यार्पण और शॉल ओढ़ाकर गौरवमयी रूप से सम्मानित किया गया।

इस महत्वपूर्ण श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी विजय बाबू अग्रवाल ने की, जबकि पूर्व विधायक दया सिंधु शंखधार कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित रहे। वहीं, मुख्य अतिथि के रूप में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक तुषार कांत हिन्दुस्तानी विशेष रूप से उपस्थित रहे। पूरी सभा का कुशल संचालन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ब्रज प्रांत के प्रांत संयोजक मोहम्मद कमर चौधरी ने किया। कार्यक्रम को अनुज माहेश्वरी, अरविंद अग्रवाल, सलमान हैदर नकवी, आदर्श सक्सेना और सुभाष गौड़ सहित अनेक प्रबुद्ध वक्ताओं ने संबोधित करते हुए शहीदों के पदचिन्हों पर चलने का संकल्प दोहराया। इस गौरवमयी आयोजन में क्षेत्र के सम्मानित सभासदों, चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बहुत बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने उपस्थित होकर देश के अमर शहीदों को अपनी कृतज्ञता प्रकट की।

 

 

 

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