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चकिया: शमशेर पुल के नीचे अतिक्रमण का साम्राज्य, सिंचाई विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल।

अवैध कब्जों से पुल के अस्तित्व पर खतरा, कार्यालय से नदारद रहते हैं जिम्मेदार अधिकारी।

संवाददाता: शैलेश सिंह

चकिया (चन्दौली)। चकिया क्षेत्र स्थित शमशेर ब्रिज इन दिनों अवैध अतिक्रमण का गढ़ बन चुका है। पिछले कई वर्षों से पुल के नीचे और आसपास की सरकारी जमीन पर भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारकों का बोलबाला है। आश्चर्य की बात यह है कि प्रशासन और संबंधित विभागों की नाक के नीचे यह खेल बेखौफ जारी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। जहाँ पूर्व में खाली जमीन दिखाई देती थी, वहाँ अब पक्के निर्माण, टिन शेड और दुकानों का जाल बिछ गया है, जिससे पूरे इलाके की सूरत ही बदल गई है।

स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इस तरह का बड़े पैमाने पर अतिक्रमण संभव नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुल के नीचे बढ़ता यह अवैध निर्माण केवल सरकारी जमीन का नुकसान नहीं है, बल्कि पुल की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है। जलनिकासी बाधित होने के कारण बारिश के समय यहाँ बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं, जिससे पुल की नींव पर अत्यधिक दबाव बढ़ेगा और भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस मामले में सिंचाई विभाग की भूमिका सबसे अधिक संदिग्ध मानी जा रही है। जब इस संबंध में विभाग का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो कार्यालय में जेई (JE) मौजूद नहीं मिले। स्थानीय किसानों का कहना है कि जेई साहब कभी कार्यालय में दर्शन नहीं देते, शायद यही कारण है कि उन्हें अपनी आंखों के सामने होता यह अतिक्रमण दिखाई नहीं दे रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम न उठाए जाने से जनता में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों और व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अवैध कब्जों को नहीं हटाया गया, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस बेलगाम अतिक्रमण पर कब चाबुक चलाता है।

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