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बहेड़ी: रमज़ान की शुरुआत में नन्हीं बहनों ने रखा पहला रोज़ा, घर में छा गई खुशियों की लहर।

रमज़ान की शुरुआत में नन्हीं बहनों ने रखा पहला रोज़ा, घर में छा गई खुशियों की लहर।

मोहम्मद वसीम, संवाददाता

बहेड़ी, बरेली। रमज़ान के पाक महीने के आगाज़ के साथ ही नगर की फिज़ा में इबादत की रौनक दिखाई देने लगी। मस्जिदों से गूंजती तरावीह और घरों में सजती इफ्तार की दरी के बीच इस बार एक परिवार में खास खुशी देखने को मिली। मोहल्ले की दो सगी बहनें—आयशा और माहिरा—ने अपना पहला रोज़ा मुकम्मल किया।

कम उम्र में ही दोनों बच्चियों ने जिस लगन और श्रद्धा के साथ रोज़ा रखा, वह पूरे परिवार के लिए गर्व का मौका बन गया। सहरी के वक्त उनका उत्साह और उमंग देखने लायक था। परिजनों ने बताया कि वे कई दिनों से अपने पहले रोज़े का बेसब्री से इंतजार कर रही थीं।

दिनभर की गर्मी और थकान के बावजूद दोनों बहनों ने धैर्य और शुकर के साथ रोज़ा रखा। इफ्तार के समय घर में मानो त्योहार का माहौल बन गया। खास पकवान तैयार किए गए और परिवार ने बच्चियों को गले लगाकर उनकी हौसला अफजाई की।

मोहल्ले के बुजुर्गों ने भी इस घटना की सराहना की और बच्चियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआ की।

आयशा और माहिरा ने साझा किया:

“हम बहुत खुश हैं कि हमने अपना पहला रोज़ा रखा। अल्लाह से दुआ है कि आगे भी रोज़े रखने की ताक़त मिले।”

परिजनों का कहना है कि बच्चों में धार्मिक संस्कार बचपन से विकसित करना उन्हें अनुशासन और मानवता की राह पर मजबूती से आगे बढ़ाता है। रमज़ान केवल भूख-प्यास सहने का महीना नहीं, बल्कि आत्मसंयम, अनुशासन और इंसानियत का पाठ भी है।

बहेड़ी में इन नन्हीं इबादतगुज़ारों का पहला रोज़ा रमज़ान की शुरुआत को और भी यादगार बना गया।

 

 

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