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बलरामपुर: मध्यान्ह भोजन योजना में 11 करोड़ से अधिक का घोटाला, 03 और अभियुक्त गिरफ्तार।

मध्यान्ह भोजन योजना में 11 करोड़ से अधिक का घोटाला, 03 और अभियुक्त गिरफ्तार।

गुलाम नबी कुरैशी, संवाददाता 

बलरामपुर। जनपद में मध्यान्ह भोजन योजना (डीसी एमडीएम) के तहत सरकारी दस्तावेजों में कूटरचना कर 11 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी धन के गबन के मामले में पुलिस ने 03 और अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। थाना कोतवाली नगर पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद अब तक कुल 12 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

जानकारी के अनुसार, दिनांक 26 नवंबर 2025 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बलरामपुर श्री शुभम शुक्ला की जांच के उपरांत इस घोटाले को लेकर थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस संबंध में मु0अ0सं0 297/2025 धारा 409, 467, 468, 471, 120(B), 201 भादवि के अंतर्गत मामला पंजीकृत है। प्रकरण में कुल 45 अभियुक्त नामजद हैं।

पुलिस को मुखबिर खास से सूचना मिलने पर 14 जनवरी 2026 को तीन अभियुक्तों को विभिन्न स्थानों से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्तों में

वकील अहमद नूरी पुत्र अब्दुल समद, उम्र 40 वर्ष, निवासी घैसहवा, थाना पचपेड़वा,

मोहम्मद मुख्तार पुत्र साहेबजाद, उम्र 45 वर्ष, निवासी ग्राम मध्यनगर, थाना पचपेड़वा,

मोहम्मद नजीर पुत्र रहमतुल्ला, उम्र 40 वर्ष, निवासी बरगदवा, वार्ड नं-1, थाना पचपेड़वा, जनपद बलरामपुर शामिल हैं।

तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर विधिक कार्रवाई करते हुए माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में पूर्व में फिरोज अहमद, अशोक कुमार गुप्ता, नसीम अहमद, मोहम्मद अहमदुल कादरी, मलिक मुन्नवर, साहेबराम, दानिश, नूरुल हसन खान और गुलाम गौसुल बरा सहित 09 अभियुक्तों की गिरफ्तारी पहले ही की जा चुकी है।

पूछताछ में अभियुक्तों ने खुलासा किया कि वे लोग जिला समन्वयक मध्यान्ह भोजन योजना फिरोज अहमद खान के साथ मिलकर बेसिक शिक्षा विभाग के आईवीआरएस पोर्टल से छात्रों की संख्या प्राप्त करते थे। इसके आधार पर कन्वर्जन कास्ट के अनुसार एक्सल शीट तैयार कराई जाती थी, जिसे जिलाधिकारी से अनुमोदन के बाद पीएफएमएस पोर्टल पर अपलोड किया जाना था। लेकिन मूल एक्सल शीट अपलोड करने के बजाय उसमें कूटरचना कर कुछ विद्यालयों के खातों में धनराशि बढ़ा दी जाती थी और उतनी ही राशि अन्य विद्यालयों के खातों से घटा दी जाती थी, जिससे कुल स्वीकृत धनराशि में कोई अंतर दिखाई न दे।

जिन विद्यालयों के खातों में धनराशि बढ़ाई जाती थी, वहां के प्रधानाध्यापक, ग्राम प्रधान और अभिभावक समिति के अध्यक्ष द्वारा राशि निकालकर आपस में बांट ली जाती थी। इसी तरीके से करोड़ों रुपये के सरकारी धन का गबन किया गया।

पुलिस ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है और शेष अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। मध्यान्ह भोजन जैसी जनकल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

Byte- विकास कुमार पुलिस अधीक्षक बलरामपुर

 

 

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