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बलरामपुर में राशन गेहूं की सप्लाई पर उठे सवाल, गोदाम में बोरे भिगोकर वजन बढ़ाने का आरोप, वीडियो वायरल।

बलरामपुर में राशन गेहूं की सप्लाई पर उठे सवाल, गोदाम में बोरे भिगोकर वजन बढ़ाने का आरोप, वीडियो वायरल।

गुलाम नबी कुरैशी, संवाददाता 

बलरामपुर। बलरामपुर जनपद में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित होने वाले राशन गेहूं की आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सदर विकास खंड के खुटेहना स्थित उत्तर प्रदेश राज्य भंडार गृह से जुड़ा महज 9 सेकेंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में टुल्लू पंप के माध्यम से गेहूं के बोरे पानी से भिगोते हुए दिखाए जाने का दावा किया जा रहा है।

आरोप है कि गोदाम में गेहूं के बोरों में पानी डालकर उनका वजन कृत्रिम रूप से बढ़ाया जा रहा है, ताकि अधिक वजन दिखाकर इन्हें सरकारी राशन दुकानों तक भेजा जा सके। वीडियो सामने आने के बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, बलरामपुर जनपद में हर महीने लगभग 15 लाख 96 हजार 130 लाभार्थियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत प्रति व्यक्ति दो किलो गेहूं वितरित किया जाता है। इस प्रकार प्रतिमाह करीब 31 हजार क्विंटल गेहूं सरकारी गोदामों से राशन दुकानों तक भेजा जाता है। इतनी बड़ी मात्रा में वितरण के दौरान किसी भी स्तर पर होने वाली अनियमितता का सीधा असर गरीब लाभार्थियों और राशन कोटेदारों पर पड़ता है।

सामान्य स्थिति में गेहूं में नमी की मात्रा 8 से 12 प्रतिशत तक होती है, लेकिन यदि बोरे में पानी डाला जाए तो नमी बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इससे एक बोरे का वजन औसतन तीन से चार किलो तक बढ़ जाता है। आरोप है कि इसी तरीके से वजन बढ़ाए गए बोरे ट्रकों में लादकर राशन दुकानों को भेज दिए जाते हैं।

राशन कोटेदारों का कहना है कि जब यह गेहूं दुकानों पर पहुंचकर सूखता है तो उसका वजन घटकर वास्तविक स्तर पर आ जाता है। इसके चलते प्रति बोरा तीन से चार किलो तक की कमी निकलती है, जिसकी जिम्मेदारी कोटेदारों पर डाल दी जाती है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और विभागीय कार्रवाई का खतरा भी बना रहता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस तरह की कथित गतिविधियों पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो न केवल सरकारी अनाज की गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि पूरी वितरण व्यवस्था की विश्वसनीयता भी कमजोर पड़ेगी।

मामले को लेकर जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन ने बताया कि वायरल वीडियो और प्राप्त शिकायत की जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी वितरण प्रणाली को गरीब और जरूरतमंद वर्ग की जीवनरेखा माना जाता है। ऐसे में गोदाम स्तर पर होने वाली कथित हेराफेरी न केवल व्यवस्था की साख पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आम जनता के अधिकारों पर भी सीधा असर डालती है। अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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