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बलरामपुर में राप्ती की कटान से तबाही — गंगा बकस भगड़पुर गांव के ग्रामीण बेघर, प्रशासन मौन

बकस भगड़पुर गांव के ग्रामीण बेघर, प्रशासन मौनबलरामपुर में राप्ती की कटान से तबाही — गंगा बकस भगड़पुर गांव के ग्रामीण बेघर, प्रशासन मौन।

गुलाम नबी कुरैशी, संवाददाता 

बलरामपुर। बलरामपुर जिले से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित गंगा बकस भगड़पुर गांव में राप्ती नदी की लगातार हो रही कटान ने ग्रामीणों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। कटान के चलते दर्जनों मकान, खेत और फसलें नदी की धारा में समा चुकी हैं। ग्रामीण अब झोपड़ियों में किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं और प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार अधिकारियों से राहत और पुनर्वास की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। एक वर्ष पूर्व जब ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर मुख्यालय की ओर निकले थे, तो घंटों सड़क पर खड़े रहने के बावजूद कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। उल्टे मौके पर पहुंची पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। ग्रामीणों ने यह दृश्य मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड किया था, जिसमें एक व्यक्ति रोते हुए यह कहते नजर आया — “हमारी आवाज कोई नहीं सुनता।”

राप्ती नदी की कटान ने गांव के लोगों के सपनों, खेतों और रोज़गार को छीन लिया है। किसी की 10 बीघा, किसी की 20 बीघा तो किसी की 40 बीघा तक जमीन नदी में समा चुकी है। कई परिवार अब खेतों के अवशेषों पर फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं। जब कटान तेज होती है, तो पूरा गांव सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर जाता है।

ग्रामीणों का कहना है — “आज यहाँ खाएँ, कल वहाँ; जब कटान बढ़ता है तो सब छोड़कर भागना पड़ता है।”

गांव तक पहुंचने के लिए न कोई सड़क है, न पुल। सिर्फ नाव ही एकमात्र साधन है। स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत भी बेहद खराब है। एक बुजुर्ग महिला ने बताया — “किसी महिला को प्रसव पीड़ा हो जाए, तो अस्पताल पहुंचते-पहुंचते मौत हो जाती है, क्योंकि एम्बुलेंस नहीं आती।”

ग्रामीणों ने बताया कि एक बार लेखपाल द्वारा ₹8000 मुआवजा दिया गया था, उसके बाद से किसी भी प्रभावित परिवार को कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली। महिलाओं का कहना है कि अब या तो उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए या वहीं जीने-मरने की अनुमति दी जाए।

राजनीतिक उपेक्षा पर ग्रामीणों का आक्रोश

ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाया। उनका कहना है कि नेता केवल चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं, वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद पांच वर्षों तक कोई हाल-चाल नहीं लेता।

ग्रामीणों ने मांग की है कि कटान प्रभावित परिवारों को तत्काल पुनर्वास और मुआवजा दिया जाए, गांव में सड़क और नाव घाट की स्थायी व्यवस्था हो, साथ ही स्वास्थ्य केंद्र और आपात सहायता केंद्र की स्थापना की जाए। साथ ही, प्रशासन जल्द से जल्द कटान रोकने की ठोस योजना बनाकर लागू करे।

बाइट- पीड़ित 

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