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सैयदराजा प्राथमिक विद्यालय नंबर-3 में मिड-डे मील घोटाला।

सैयदराजा प्राथमिक विद्यालय नंबर-3 में मिड-डे मील घोटाला।

24 कुंतल राशन पर उठा सवाल, सभासद और अध्यापक पर आरोप, जांच की मांग तेज।

संवाददाता : मनीष कुमार मौर्य

चंदौली। जनपद के सैयदराजा नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड नंबर-9 स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर-3 में मिड-डे मील का राशन गबन करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि सितंबर 2024 में बच्चों के भोजन के लिए आवंटित 24 कुंतल राशन विद्यालय के इंचार्ज अध्यापक मंसूर अंसारी और वार्ड की सभासद गीता देवी की मिलीभगत से हजम कर लिया गया। इस खुलासे ने नगर पंचायत ही नहीं, बल्कि पूरे जिले की राजनीति को गर्मा दिया है और अब यह मामला प्रशासन तक जा पहुंचा है।

मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह खबर आग की तरह फैल गई। विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर यह चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गई है। विपक्षी दलों और स्थानीय नेताओं ने इसे भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही से जोड़ते हुए जिला प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग शुरू कर दी है। लोगों का कहना है कि यदि बच्चों के हक का राशन भी सुरक्षित नहीं है तो सरकारी योजनाओं का भविष्य अधर में है।

इस प्रकरण में सभासद गीता देवी और विद्यालय के इंचार्ज अध्यापक मंसूर अंसारी पर सीधा आरोप लगाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि दोनों की मिलीभगत से राशन का उठान तो जरूर हुआ लेकिन वह बच्चों की थालियों तक नहीं पहुंच पाया। विद्यालय के रजिस्टरों में राशन के खर्च का सही हिसाब दर्ज नहीं है और अभिलेखों में भी कोई पुख्ता प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

इंचार्ज अध्यापक मंसूर अंसारी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा उठाया गया राशन नियमित रूप से बच्चों को मिड-डे मील में परोसा गया है और जो भी रिकॉर्ड है वह विभाग को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभासद द्वारा उठाए गए राशन की जानकारी उन्हें नहीं है।

वहीं तत्कालीन प्रधानाध्यापक अनिल कुमार पांडेय ने स्वीकार किया कि सितंबर 2024 में कोटेदार से राशन का उठान तो हुआ लेकिन खर्च का उल्लेख अभिलेखों में दर्ज नहीं है। उनके अनुसार यह गंभीर जांच का विषय है और विभागीय स्तर पर पड़ताल के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।

सभासद गीता देवी के प्रतिनिधि अंकित जायसवाल ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि विद्यालय में अक्सर चोरी जैसी घटनाएं होती रहती हैं। इसी कारण पारदर्शिता बनाए रखने और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राशन का उठान सभासद ने किया था। उनका कहना है कि बच्चों को नियमित भोजन दिया गया है और कुछ राशन अब भी शेष है जिसका पूरा हिसाब जल्द ही विभाग को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि गबन का सवाल ही नहीं उठता, यदि ऐसा कुछ होता तो प्रशासन अब तक कार्रवाई कर चुका होता।

इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद सैयदराजा नगर पंचायत के साथ-साथ पूरे जिले की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्षी नेताओं ने इसे भ्रष्टाचार और शासन की योजनाओं पर कलंक बताते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि बच्चों का राशन ही हजम कर लिया जाएगा तो यह न सिर्फ शर्मनाक है बल्कि प्रदेश सरकार की योजनाओं पर सीधा सवाल है।

अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि जांच में दोषियों पर कार्रवाई होती है या यह मामला भी समय के साथ दबा दिया जाएगा। फिलहाल अभिभावक और स्थानीय लोग प्रशासनिक कदम का इंतजार कर रहे हैं।

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