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बहेड़ी में रबीउल अव्वल जलसे पर रोक से गहराया विवाद, 70 साल पुरानी परंपरा पर सवाल।

बहेड़ी में रबीउल अव्वल जलसे पर रोक से गहराया विवाद, 70 साल पुरानी परंपरा पर सवाल।

संवाददाता – मोहम्मद वसीम

बहेड़ी, (बरेली)। में इस वर्ष रबीउल अव्वल (बारा वफात) पर निकाले जाने वाले पारंपरिक जलसा-ए-मोहम्मदी और जुलूस को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन द्वारा अनुमति न दिए जाने पर मुस्लिम समाज में रोष बढ़ गया है।

सोमवार को अंजुमन बोस्ताने मदार, अंजुमन गुलामाने रसूल और अंजुमन खुद्दामे आलिया के पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि बहेड़ी में पिछले 70 वर्षों से यह जलसा आयोजित होता आया है और शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न होता रहा है। इस बार अनुमति रोकने का निर्णय धार्मिक आस्था को ठेस पहुँचाने जैसा है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि नैनीताल रोड पर दशकों से यह जुलूस निकाला जाता है। पूर्व में प्रशासन ने इसकी अनुमति दी है, लेकिन इस बार पुलिस की रोक ने परंपरा पर संकट खड़ा कर दिया है।

अनुमति की मांग करने वालों में टीएमसी प्रमुख डॉ. सय्यद इंतखाब आलम, हाफिज अनबार शेरी, कारी अतीक रज़ा, मौलाना राशिद कादरी, मौलाना अदनान रजा, जलीस मियां मदारी, नाजिर नियाज़ी, खालिक चौधरी सहित कई संगठन और जिम्मेदार लोग मौजूद रहे। किसान यूनियन से मो. ज़ुबैर, टीएमसी से मो. फैजान वारसी, मो. शारिक जाफरी, एचएफडब्ल्यू से मेराज सिद्दीकी, मो. रेहान, और मोईन रजा (जीडब्लूएस) ने भी प्रशासन से परंपरा को बनाए रखने की मांग की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दिन पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद ﷺ की पैदाइश से जुड़ा हुआ है और जलसा उनकी आस्था का अहम हिस्सा है। ऐसे में प्रशासन से अनुमति मिलना आवश्यक है।

बाइट- हाफिज अनवार अहमद शेरी।

बाइट- डॉ. सय्यद इंतखाब आलम, टीएमसी प्रमुख।

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