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गंगा का रौद्र रूप देख सहमे तटवर्ती ग्रामीण, हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन जलमग्न।

गंगा का रौद्र रूप देख सहमे तटवर्ती ग्रामीण, हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन जलमग्न।

रामकृपाल सिंह, संवाददाता

चहनियां, चंदौली। गंगा का जलस्तर लगातार तेजी से बढ़ रहा है और तटवर्ती गांवों के लिए खतरा बनता जा रहा है। पिछले तीन दिनों में गंगा ने अपना रुख बदलते हुए किनारे छोड़ दिए हैं और अब पानी रिहायशी इलाकों की तरफ बढ़ने लगा है। बलुआ घाट पूरी तरह से डूब चुका है और अब पानी बाजार की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

गंगा किनारे बसे गांवों में दहशत का माहौल है। भुपौली, डेरवा, महड़ौरा, कांवर, पकड़ी, महुअरिया, विसुपुर, महुआरी खास, सराय, बलुआ, डेरवाकला, महुअरकला, हरधनजुड़ा, गंगापुर, पुराबिजयी, पुरागणेन, चकरा, सोनबरसा, टांडाकला, महमदपुर, सरौली, तीरगांवा, हसनपुर, बड़गांवा, नादी निधौरा और सहेपुर जैसे तटवर्ती गांव सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं। इन गांवों के किसानों और ग्रामीणों की हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन गंगा में समाहित हो चुकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस वर्ष अब तक दो बार गंगा का प्रकोप झेल चुके हैं और तीसरी बार जलस्तर बढ़ने से वे फिर से सदमे में हैं। फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो चुकी है। लोग अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की तलाश कर रहे हैं, वहीं कई ग्रामीण अभी भी अपने घरों को छोड़ने को मजबूर नहीं हुए हैं।

टांडा में हालात और भयावह होते जा रहे हैं। यहां गंगा का पानी बाजार और रिहायशी इलाकों की तरफ बढ़ने लगा है। स्थानीय लोग प्रशासन से लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक किसी ठोस व्यवस्था की जानकारी सामने नहीं आई है। गांवों में दहशत का माहौल है और लोग अपने बच्चों और परिवार के साथ सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सोच रहे हैं।

ग्रामवासियों ने बताया कि गंगा का जलस्तर जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उससे आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य की तैयारी की बातें तो की जा रही हैं, लेकिन जमीन पर ग्रामीणों को कोई ठोस सहारा अभी तक नहीं मिला है।

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