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अक्षय कुमार वध, लंका दहन और विभीषण शरणागति के प्रसंगों से भावुक हुए दर्शक।

अक्षय कुमार वध, लंका दहन और विभीषण शरणागति के प्रसंगों से भावुक हुए दर्शक।

घूरेलाल कन्नौजिया, ब्यूरो चीफ 

सैयदराजा (चंदौली)।  रामलीला समिति शिवानगर के तत्वावधान में आयोजित भव्य रामलीला में शुक्रवार की रात्रि अशोक वाटिका, अक्षय कुमार वध, लंका दहन और विभीषण शरणागति के अद्भुत प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति देखकर दर्शक भाव-विभोर हो उठे और पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।

लीला में दर्शाया गया कि श्रीराम से मित्रता के उपरांत सुग्रीव ने माता सीता की खोज हेतु वानर सेना को भेजा। दक्षिण दिशा में समुद्र पार करना किसी के लिए संभव न था, तब जामवंत जी ने हनुमान जी को उनकी अद्भुत शक्ति का स्मरण कराया। हनुमान जी आकाश मार्ग से लंका पहुंचे, जहां उन्होंने लंकिनी का उद्धार किया और विभीषण से भेंट की। विभीषण के बताए अनुसार वे अशोक वाटिका पहुंचे और माता जानकी को श्रीराम का संदेश दिया कि प्रभु शीघ्र ही उन्हें मुक्त कराएंगे।

इस दौरान जम्बू माली से युद्ध कर हनुमान जी ने उसका वध किया। सूचना पाकर रावण ने अपने पुत्र अक्षय कुमार को भेजा, जिसका भी वध हनुमान जी ने किया। इसके बाद मेघनाथ ने ब्रह्मास्त्र से हनुमान जी को बंदी बनाकर रावण के समक्ष प्रस्तुत किया। रावण ने उनका वध करने का आदेश दिया, परंतु विभीषण ने समझाया कि दूत का वध नीति विरुद्ध है। तब रावण ने हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया, लेकिन हनुमान जी ने विभीषण का घर छोड़कर पूरी लंका को अग्नि में समर्पित कर दिया।

इसके पश्चात दिखाया गया कि रावण के अपमान से क्षुब्ध होकर विभीषण ने रावण का साथ छोड़ श्रीराम की शरण ग्रहण की। वानर सेना में उनके आगमन को लेकर संदेह था, परंतु श्रीराम ने कहा कि जो भयभीत होकर भी मेरी शरण में आता है, मैं उसे आश्रय देता हूं, चाहे वह शत्रु ही क्यों न हो। प्रभु के आदेशानुसार विभीषण का स्वागत किया गया और श्रीराम ने उन्हें लंका का भावी राजा घोषित किया।

यह प्रसंग भगवान की शरणागति के महत्व और सच्चे मन से प्रभु की शरण में आने वाले भक्त की महानता को दर्शाता है।

कार्यक्रम में रविंद्र जायसवाल, पन्नालाल केशरी, पूर्व चेयरमैन मदन प्रसाद कुशवाहा, जवाहर पांडेय, सुशील कुमार शर्मा, राकेश शर्मा, विजय गुप्ता, सभासद संतोष जायसवाल, मोहन मद्धेशिया, मीना सिंह, शकुंतला नाथ दुबे, प्रमोद विश्वकर्मा, अनिल अग्रहरी, सतनाम सिंह मोंगा, डॉ. रामआशीष मौर्य, डॉ. दीनदयाल गुप्ता, जगदीश मास्टर, बबलू सिंह, संजय कश्यप, नरेंद्र चौरसिया, कर्मचंद केशरी, अरविंद तिवारी, कृष्णा सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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