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बरेली में शुरू हुआ 30वां उत्तरायणी मेला, लोक-संस्कृति के रंगों में रंगा क्लब मैदान।

बरेली में शुरू हुआ 30वां उत्तरायणी मेला, लोक-संस्कृति के रंगों में रंगा क्लब मैदान।

मोहम्मद वसीम, संवाददाता

बरेली। बरेली क्लब मैदान में मंगलवार से शुरू हुए उत्तरायणी मेले ने पूरे शहर को उत्तराखंड की लोक-संस्कृति और परंपराओं के रंग में रंग दिया। 30वें उत्तरायणी मेले के उद्घाटन अवसर पर ढोल-दमाऊं, छोलिया नृत्य और पारंपरिक लोकगीतों ने समां बांध दिया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भले ही कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने वर्चुअल माध्यम से मेले का उद्घाटन कर लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और देवभूमि की पहचान को सुरक्षित रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में महामंडलेश्वर स्वामी वीरेंद्रानंद महाराज एवं पार्थ गौतम ने फीता काटकर मेले की शुरुआत की। उत्तरायणी जनकल्याण समिति के अध्यक्ष अमित पंत ने बताया कि यह मेला 13 से 15 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा और इसका उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को देश-प्रदेश के लोगों तक पहुंचाना है।

सुबह कोतवाली से निकली रंगयात्रा मेले का मुख्य आकर्षण रही, जिसमें पारंपरिक परिधान पहने कलाकारों ने ढोल-दमाऊं और छोलिया नृत्य के साथ पूरे शहर को उत्सव के माहौल में बदल दिया।

मेले में पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प, लोकवेश और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की खास व्यवस्था की गई है। महामंत्री मनोज पांडेय व कोषाध्यक्ष कमलेश बिष्ट ने बताया कि आम जनता के लिए मेला पूरी तरह निःशुल्क है और सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहेगा।

आयोजकों के अनुसार दूसरे दिन उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और तीसरे दिन महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी व नैनीताल सांसद अजय भट्ट के शामिल होने की संभावना है। उत्तरायणी मेला न केवल उत्तराखंडवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ रहा है, बल्कि अन्य प्रदेशों के लोगों को भी देवभूमि की संस्कृति से रूबरू करा रहा है।

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