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प्रशासन की नाक के नीचे हरियाली पर ‘आरी’, उसहैत में बेखौफ वन माफिया।

प्रशासन की नाक के नीचे हरियाली पर ‘आरी’, उसहैत में बेखौफ वन माफिया।

संवाददाता, शिवेन्द्र यादव 

उसहैत (बदायूं)। एक तरफ सरकार पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए करोड़ों की लागत से वृक्षारोपण अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर बदायूं के उसहैत कस्बे में वन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। यहाँ चंद रुपयों के लालच में ऑक्सीजन देने वाले हरे-भरे फलदार पेड़ों पर धड़ल्ले से आरी चलाई जा रही है। माफियाओं द्वारा आम, शीशम, नीम, पाकड़ और पीपल जैसे महत्वपूर्ण वृक्षों का सफाया किया जा रहा है, लेकिन संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन इस विनाश पर मूकदर्शक बना हुआ है।

साठगांठ का खेल: अनुमति आठ की, कट रहे दर्जनों पेड़

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वन माफिया स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के साथ कथित मिलीभगत से इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि ठेकेदार विभाग से मात्र 8-10 पेड़ काटने की अनुमति लेते हैं, लेकिन उसकी आड़ में पूरे के पूरे बाग साफ कर दिए जाते हैं। इन कटे हुए पेड़ों को कस्बे के आसपास स्थित टालों पर इकट्ठा किया जाता है और फिर ट्रकों के जरिए जिले से बाहर भेज दिया जाता है।

शिकायतें बेअसर, कार्रवाई का इंतजार

क्षेत्र में लगातार हो रही इस कटाई से स्थानीय लोगों में भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से लिखित व मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों की इस चुप्पी ने वन माफियाओं को और अधिक शह दे दी है। हैरानी की बात यह है कि खाकी की मौजूदगी के बावजूद माफिया बेखौफ होकर कुदरती ऑक्सीजन देने वाले इन पेड़ों को काट रहे हैं।

इस गंभीर मामले में जब डीएफओ (DFO) निधि चौहान से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका कॉल रिसीव नहीं हुआ। प्रशासन की यह अनदेखी पर्यावरण के लिए बड़े खतरे की घंटी है। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कीजाए।

 

 

 

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