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संघर्षों की दीवार तोड़कर सेना में भर्ती हुए सहसवान के ऋषिपाल, सफलता की खबर से सोनवूढी गांव में मना जश्न।

संघर्षों की दीवार तोड़कर सेना में भर्ती हुए सहसवान के ऋषिपाल, सफलता की खबर से सोनवूढी गांव में मना जश्न।

संवाददाता, शैलेन्द्र सिंह 

सहसवान (बदायूं)। तहसील क्षेत्र के ब्लॉक दहगवां अंतर्गत आने वाले ग्राम सोनवूढी में उस समय जश्न का माहौल हो गया, जब ग्रामीणों को पता चला कि गांव के होनहार युवक ऋषिपाल का चयन भारतीय सेना में हो गया है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से न सिर्फ ऋषिपाल के परिवार में बल्कि पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई है। देश सेवा के लिए चुने गए ऋषिपाल ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां के त्याग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और अपनी अटूट कड़ी मेहनत को दिया है।

ऋषिपाल की यह कामयाबी इतनी आसान नहीं थी, इसके पीछे संघर्ष की एक लंबी दास्तान छिपी है। उन्होंने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें समाज के कई तानों और नकारात्मक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा, जहाँ लोग अक्सर कहते थे कि वह जीवन में कुछ नहीं कर पाएंगे।

इसके अलावा, पिता इंदल सिंह के असमय निधन ने उन्हें भीतर से पूरी तरह झकझोर कर रख दिया था, लेकिन ऐसे कठिन समय में भी उनकी माता नन्ही देवी ने हार नहीं मानी और बेटे का हौसला बनी रहीं। मां के उसी प्रोत्साहन और खुद के भीतर देश सेवा के जुनून के दम पर ऋषिपाल ने विपरीत परिस्थितियों को हराकर आखिरकार सेना की वर्दी हासिल कर ली। उनकी इस बड़ी सफलता पर ग्रामीणों का कहना है कि ऋषिपाल ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी और मेहनत सच्ची हो, तो जीवन की हर बड़ी मुश्किल को पार कर अपना लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

 

 

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