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बिसौली में बिजली संकट से हाहाकार: बेपटरी हुई विद्युत व्यवस्था, भीषण गर्मी में लोग बेहाल।

लो-वोल्टेज और अघोषित कटौती से सूख रहीं किसानों की फसलें, भाकियू और व्यापारियों ने खोला मोर्चा।

आई एम खान 

बिसौली। बिसौली नगर सहित ग्रामीण इलाकों में इन दिनों बिजली आपूर्ति की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। पिछले एक सप्ताह से लगातार दिन और रात के समय हो रही अघोषित कटौती के कारण उपभोक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली आने पर भी कभी हाई तो कभी लो-वोल्टेज की आंख-मिचौली बनी रहती है, जिससे इस उमस भरी भीषण गर्मी में आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

इसी बदहाली से आक्रोशित होकर किसान उपभोक्ताओं ने तहसील परिसर में एकत्र होकर बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और धरना प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। किसानों का साफ तौर पर आरोप है कि लगातार हो रही अघोषित कटौती के कारण खेतों में खड़ी उनकी फसलें पानी के अभाव में सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं।

विद्युत संकट को लेकर नगर के व्यापारियों और प्रबुद्ध नागरिकों में भी गहरा असंतोष व्याप्त है। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष कृष्णअवतार शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में बिजली व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है और विभाग का निर्बाध बिजली देने का हर दावा धरातल पर हवाहवाई साबित हो रहा है। वहीं सर्राफा मंडल के अध्यक्ष संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि इस समय जरूरत के अनुसार बिजली की सप्लाई नाममात्र को मिल पा रही है, जिससे इस उमस भरे मौसम में लोगों का जीना मुहाल हो गया है।

उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के विधानसभा प्रभारी धर्मेंद्र वार्ष्णेय ने विभाग की लापरवाही उजागर करते हुए कहा कि चौबीस घंटे के भीतर दर्जनों बार बिजली का आना-जाना लगा रहता है और लाइनों में आई मामूली खराबी को भी ठीक करने में कर्मचारी घंटों का समय लगा देते हैं, जिससे जनता त्रस्त है।

बिजली संकट के इस गंभीर मुद्दे पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने भी अधिकारियों को आड़े हाथों लिया है। भाकियू के तहसील अध्यक्ष मुकेश भदोरिया ने कहा कि ग्रामीण अंचलों में बिजली की इस भयावह समस्या को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह से उदासीन बने हुए हैं। आम जनता और उपभोक्ता परेशान होकर गुहार लगा रहे हैं, लेकिन महकमे के जिम्मेदार अफसर मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रहे हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बिजली विभाग के अधिकारियों को अपनी सुस्ती छोड़नी होगी और हर तकनीकी खामी को तत्काल दूर करते हुए क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को सुचारू रूप से बहाल करना होगा, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

 

 

 

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