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25 वर्षों से जुड़े भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता मृगेंद्र उपाध्याय ने दिया इस्तीफा।

25 वर्षों से जुड़े भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता मृगेंद्र उपाध्याय ने दिया इस्तीफा।

गुलाम नबी कुरैशी, संवाददाता 

बलरामपुर।जनपद की राजनीति में गुरुवार को उस समय हलचल मच गई, जब भारतीय जनता पार्टी से पिछले 25 वर्षों से जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता मृगेंद्र उपाध्याय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर अपना त्यागपत्र सौंपा है।

मृगेंद्र उपाध्याय ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब यदि भाजपा उनके घर आकर भी विधानसभा चुनाव का टिकट देगी, तब भी वे पार्टी में दोबारा नहीं जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह फैसला पूरी तरह वैचारिक और आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ है।

मृगेंद्र उपाध्याय का परिवार जनसंघ काल से ही भाजपा और संघ परिवार से जुड़ा रहा है। वे स्वयं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व जिला संयोजक, हिंदू युवा वाहिनी के पूर्व जिला संयोजक, विश्व हिंदू परिषद के पूर्व जिला मंत्री तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व विस्तारक रह चुके हैं। वर्तमान में वे भाजपा के सक्रिय सदस्य थे और विधानसभा क्षेत्र 291 तुलसीपुर से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा कई बार जता चुके थे।

इस्तीफे को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा जारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों तथा कुंभ (माघ) मेला 2026 के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ कथित दुर्व्यवहार को अपने फैसले का मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और संत समाज के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता उन्हें स्वीकार नहीं है।

प्रदेश अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में मृगेंद्र उपाध्याय ने आरोप लगाया कि कुंभ मेला के दौरान साधु-संतों, बटुकों और वृद्धजनों के साथ मेला प्रशासन द्वारा लात-घूंसे और जूतों से मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस और स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई, जिससे उन्हें गहरा आघात पहुंचा है।

उन्होंने यह भी लिखा कि शंकराचार्य जैसे प्रतिष्ठित धर्मगुरु के साथ हुए कथित अपमान से न केवल वे व्यक्तिगत रूप से आहत हैं, बल्कि पूरे सनातन समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि इस पूरे घटनाक्रम में कहीं न कहीं सरकार की भूमिका भी संदेह के घेरे में आती है।

प्रेस वार्ता के दौरान मृगेंद्र उपाध्याय ने कहा,

“मैं भाजपा से केवल चुनाव या टिकट के लिए नहीं जुड़ा था। मैंने संगठन और विचारधारा के लिए 25 वर्षों तक काम किया है। लेकिन जिस तरह शंकराचार्य और संत समाज के साथ व्यवहार किया गया, वह असहनीय है। अब भाजपा चाहे कोई भी पद दे या टिकट दे, मैं उसे स्वीकार नहीं करूंगा।”

उन्होंने यह भी घोषणा की कि उनके साथ उनकी पूरी टीम भी भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रही है।

मृगेंद्र उपाध्याय के इस फैसले के बाद जिले की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा से लंबे समय से जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता का इस तरह पार्टी छोड़ना आगामी चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकता है।

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