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पूर्व कैप्टन वशिष्ठ मिश्रा को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई।

पूर्व कैप्टन वशिष्ठ मिश्रा को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई।

सेवानिवृत्ति के बाद भी समाजसेवा में रहे सक्रिय।

जयशंकर मिश्रा, संवाददाता 

चहनियां, चंदौली। वंशीपुर निवासी पूर्व कैप्टन वशिष्ठ मिश्रा के निधन पर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। गुरुवार को उनके निधन के उपरांत चंदौली से आए सैनिकों ने उनके आवास पर गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। इसके बाद पूरे सम्मान के साथ बलुआ स्थित पश्चिम वाहिनी गंगा तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

पूर्व कैप्टन वशिष्ठ मिश्रा भारतीय सेना की 62 माउंटेंस इकाई में कार्यरत रहे और बाद में कैप्टन पद पर पदोन्नत हुए। उन्होंने वर्ष 1950 में सेना में भर्ती होकर 1982 में सेवानिवृत्ति तक लगभग 32 वर्षों तक भारतीय सेना के एजुकेशन कोर में अपनी सेवाएं दीं।

सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने समाजसेवा का दायित्व निभाया। गांव में खेती-बाड़ी के साथ-साथ आसपास के बच्चों को एकत्र कर कमजोर विद्यार्थियों को अंग्रेजी सहित अन्य विषयों की निःशुल्क शिक्षा प्रदान करते रहे। वर्ष 1971 और 1974 के भारत-पाक युद्ध में भी उन्होंने भाग लेकर राष्ट्र सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अंतिम यात्रा के दौरान ग्रामीणों और उपस्थित जनसमूह ने “भारत माता की जय” और “वशिष्ठ मिश्रा अमर रहें” के नारे लगाए। वे अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

अंतिम संस्कार में एडवोकेट नंद किशोर मिश्रा, चंद्रकांत, संतोष पांडेय, ब्रह्मदेव, ऋषिकांत मिश्रा, कन्हैया गुप्ता, घरभरन गुप्ता, सेचन राम, विजय कुमार, तेजू सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।

 

 

 

 

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