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चकिया तहसील: लाखों का आरओ बना शोपीस, भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे फरियादी।

चकिया तहसील: लाखों का आरओ बना शोपीस, भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे फरियादी।

शैलेश सिंह, संवाददाता

बबुरी/चकिया (चंदौली): एक तरफ सूरज आग उगल रहा है और पारा आसमान छू रहा है, वहीं दूसरी ओर चकिया तहसील परिसर में प्रशासनिक अनदेखी आम जनता पर भारी पड़ रही है। सरकारी धन का किस कदर दुरुपयोग होता है, इसकी बानगी तहसील परिसर में लगा लाखों रुपये की लागत वाला आरओ प्लांट दे रहा है, जो लंबे समय से खराब होकर सफेद हाथी साबित हो रहा है।

भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच अपनी समस्याओं के समाधान के लिए तहसील पहुंचने वाले सैकड़ों फरियादी अब प्यास बुझाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था ठप होने के कारण लोगों को महंगे दामों पर बाजार से पानी खरीदना पड़ रहा है या फिर प्यासा ही रहना पड़ रहा है। तहसील जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र पर बुनियादी सुविधाओं का यह हाल व्यवस्था की पोल खोल रहा है।

हैरानी की बात यह है कि जिस परिसर में जिले के जिम्मेदार अधिकारी बैठते हैं और न्याय की गुहार सुनी जाती है, वहीं जनता की प्यास बुझाने वाला संयत्र धूल फांक रहा है। स्थानीय सूत्रों की मानें तो आरओ प्लांट की खराबी की जानकारी अधिकारियों को होने के बावजूद अब तक मरम्मत की दिशा में कोई सार्थक प्रयास नहीं किया गया है। अधिकारियों की यह चुप्पी फरियादियों की मुश्किलों को और बढ़ा रही है।

स्थानीय नागरिकों और अधिवक्ताओं में इस घोर लापरवाही को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब तहसील परिसर में ही जनता की प्यास का ख्याल नहीं रखा जा रहा, तो ग्रामीण इलाकों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद से कब जागेंगे और कब आम जनता को इस भीषण उमस और गर्मी में पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध हो सकेगा?

 

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