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बरेली: विकास की पटरियों पर अटका बहेड़ी: सदन में अता उर रहमान ने उठाए जमीनी मुद्दे।

विकास की पटरियों पर अटका बहेड़ी: सदन में अता उर रहमान ने उठाए जमीनी मुद्दे।

मोहम्मद वसीम, संवाददाता

बरेली। उत्तर प्रदेश विधानसभा के सत्र में इस बार केवल आंकड़ों और योजनाओं की चर्चा नहीं हुई, बल्कि जमीनी समस्याओं की गूंज भी सुनाई दी। बहेड़ी से विधायक एवं पूर्व मंत्री अता उर रहमान ने अपने क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को सदन में मजबूती से उठाया, जिससे बहस विकास और प्रशासनिक सुस्ती के मुद्दे पर केंद्रित हो गई।

गन्ना भुगतान पर सवाल

विधायक ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि जब किसान अपनी ही उपज की कीमत के लिए इंतजार करता है, तो यह केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि नीतिगत कमी का संकेत है। उन्होंने भुगतान प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने की मांग की।

मेडिकल कॉलेज का प्रस्ताव

स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का जिक्र करते हुए उन्होंने कताई मिल की खाली पड़ी भूमि पर मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि तराई क्षेत्र के लोगों को गंभीर उपचार के लिए दूर शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज से स्वास्थ्य सेवाओं के साथ स्थानीय युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलेंगे।

यातायात अव्यवस्था पर चिंता

रिछा और केसर मिल रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण की मांग रखते हुए उन्होंने कहा कि लगातार लगने वाला जाम व्यापार और आमजन दोनों को प्रभावित कर रहा है। बहेड़ी रेलवे स्टेशन पर फुटओवर ब्रिज निर्माण की भी आवश्यकता बताई, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

आपात सेवा और कर व्यवस्था

उन्होंने आपातकालीन सेवा 112 की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की मांग की। साथ ही नगरपालिका द्वारा बढ़ाए गए हाउस टैक्स की समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया, जिसे उन्होंने आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ बताया।

खेल और उद्योग पर जोर

युवाओं के लिए स्टेडियम निर्माण का प्रस्ताव रखते हुए उन्होंने खेल अवसंरचना को सामाजिक विकास का माध्यम बताया। क्षेत्र की राइस मिलों के लिए एक्सपोर्ट प्वाइंट स्थापित करने की मांग करते हुए कहा कि इससे बहेड़ी को व्यापारिक पहचान मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने एक शेर पढ़कर बजट और जमीनी वास्तविकता के अंतर को रेखांकित किया—

“उसने पढ़ा करोड़ों का एवान में बजट,

लेकिन उदास लोगों के चेहरे नहीं पढ़े।”

सदन में उठाई गई यह आवाज अब रिकॉर्ड का हिस्सा भर नहीं, बल्कि बहेड़ी के विकास की दिशा तय करने वाली परीक्षा की भूमिका बन गई है।

 

 

 

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