Breaking News

बरेली: फर्जी हवलदार बनकर अग्निवीर अभ्यर्थियों को पास कराने का खेल, 40 हजार की डिजिटल पेमेंट ने खोला राज।

फर्जी हवलदार बनकर अग्निवीर अभ्यर्थियों को पास कराने का खेल, 40 हजार की डिजिटल पेमेंट ने खोला राज।

संवाददाता: मोहम्मद वसीम

बरेली: अग्निवीर भर्ती में री-मेडिकल को पास कराने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से रकम ऐंठने वाले गिरोह का कैंट पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने पर्दाफाश किया है। सेना का सेवानिवृत्त हवलदार बनकर अभ्यर्थियों को अपने जाल में फंसाने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से फर्जी मोहर, लेटर, अभ्यर्थियों का रिकॉर्ड रखने वाला रजिस्टर और मोबाइल फोन बरामद हुआ है। मोबाइल की जांच में एक अभ्यर्थी से 40 हजार रुपये के डिजिटल लेनदेन का साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने ठगी के नेटवर्क की परतें खंगालनी शुरू कर दी हैं।

पुलिस के मुताबिक 25 अगस्त को मिलिट्री इंटेलिजेंस को सूचना मिली थी कि मिलिट्री अस्पताल के आसपास एक व्यक्ति अग्निवीर जनरल ड्यूटी के री-मेडिकल में फेल अभ्यर्थियों को पास कराने का झांसा देकर रकम वसूलने की कोशिश कर रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए कैंट पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस की टीम ने घेराबंदी कर आरोपी राजेश तिवारी, निवासी कृष्ण विहार कॉलोनी, आईआईएम रोड, लखनऊ को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी की तलाशी में फर्जी मोहर, फर्जी लेटर, मोबाइल फोन और अभ्यर्थियों की जानकारी वाला रजिस्टर बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार मोबाइल की जांच में 21 अगस्त को अंकित सिंह चौहान नाम के अभ्यर्थी की यूपीआई आईडी से राजेश तिवारी के खाते में 40 हजार रुपये भेजे जाने का डिजिटल साक्ष्य मिला। जांच में यह भी सामने आया कि जिस अभ्यर्थी से रकम का लेनदेन हुआ, उसका नाम आरोपी के पास मिले रजिस्टर में दर्ज था। पुलिस का कहना है कि आरोपी अभ्यर्थियों को री-मेडिकल में पास कराने के नाम पर 40 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की रकम मांगता था।

पूछताछ में राजेश ने पुलिस को बताया कि वह पहले जबलपुर में सेना भर्ती की तैयारी कराने वाली अकादमी चलाता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात गजेंद्र सिंह से हुई। पुलिस के मुताबिक इसी संपर्क के बाद दोनों ने अभ्यर्थियों को री-मेडिकल में पास कराने का झांसा देकर रकम वसूलने का खेल शुरू किया। आरोपी फर्जी दस्तावेज और कॉल लेटर दिखाकर अभ्यर्थियों का भरोसा जीतता था। भर्ती प्रक्रिया की जानकारी रखने के कारण वह अभ्यर्थियों को आसानी से अपने प्रभाव में ले लेता था।

पुलिस को राजेश के मोबाइल से गजेंद्र सिंह के नाम से वाट्सऐप चैट भी मिली है। चैट में अभ्यर्थियों के रेफरल फॉर्म और रुपये के लेनदेन से जुड़ी बातचीत सामने आई है। पुलिस के अनुसार राजेश अभ्यर्थियों की जानकारी गजेंद्र को भेजता था। रकम मिलने के बाद उसका एक हिस्सा अपने पास रखकर शेष रकम बताए गए खाते में भेजने की बात भी जांच में सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी के दिन भी राजेश मिलिट्री अस्पताल के आसपास नए अभ्यर्थियों की तलाश में घूम रहा था। इसी दौरान मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिली सूचना के आधार पर टीम ने उसे दबोच लिया। उसका साथी गजेंद्र सिंह अभी फरार है, और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। एसपी सिटी मानुष पारिक के मुताबिक मामले में बरामद मोबाइल, वाट्सऐप चैट, रजिस्टर, फर्जी दस्तावेज और डिजिटल लेनदेन को जांच का आधार बनाया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक कितने अभ्यर्थियों को अपना शिकार बनाया और इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।

बाइट : मानुष पारिक, एसपी सिटी बरेली

 

Spread the love

Check Also

गंजडुंडवारा में अकीदत और शानो-शौकत के साथ निकला बारावफात का जुलूस।

गंजडुंडवारा में अकीदत और शानो-शौकत के साथ निकला बारावफात का जुलूस। संवाददाता, वसीम कुरैशी  कासगंज: …