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बदायूँ: नमामि गंगे कार्यक्रम से स्वच्छ हो रही गंगा नदी, कई परियोजनाओं में कार्य प्रगति पर।

बदायूँ: नमामि गंगे कार्यक्रम से स्वच्छ हो रही गंगा नदी, कई परियोजनाओं में कार्य प्रगति पर।

बदायूँ।  हिमालय से निकलकर उत्तर प्रदेश से बहती गंगा नदी सदियों से पवित्र, पतितपावनी और मोक्षदायिनी मानी जाती रही है। भारतीय संस्कृति में गंगा के प्रति गहरी आस्था रही है और इसके किनारे बसे नगरों में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां सदैव जीवंत रही हैं। हाल के दशकों में औद्योगिक विकास और अपशिष्ट जल के प्रवाह के कारण गंगा जल प्रदूषित होने लगा था।

इस संकट को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने नमामि गंगे कार्यक्रम शुरू किया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय नदी गंगा के प्रदूषण में कमी, संरक्षण और पुनरुद्धार करना है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य स्वच्छ गंगा मिशन-उत्तर प्रदेश के अंतर्गत गंगा की सफाई और संरक्षण हेतु व्यापक परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।

राज्य में 74 सीवर शोधन परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 39 पूर्ण हो चुकी हैं, 22 प्रगतिशील हैं, 2 परियोजनाओं के लिए कार्यादेश जारी हैं, 9 परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है और 2 नई परियोजनाएं हाल ही में स्वीकृत हुई हैं। इन सभी परियोजनाओं पर कुल ₹16,177.12 करोड़ खर्च होंगे और इनके पूर्ण होने से 2,288.30 एमएलडी सीवेज का शोधन संभव होगा।

वर्तमान में राज्य में 32 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माणाधीन हैं जिनकी कुल क्षमता 900.10 एमएलडी है। इसके अतिरिक्त 8 परियोजनाएं टेंडर प्रक्रिया में हैं जिनकी क्षमता 483 एमएलडी है। अभी 9 परियोजनाओं के लिए डीपीआर तैयार हैं जिनकी प्रस्तावित क्षमता 555 एमएलडी है। अब तक कुल 38 परियोजनाओं का निर्माण पूर्ण हुआ है और उनकी शोधन क्षमता 849.70 एमएलडी है।

राज्य में कुल 5 औद्योगिक उत्प्रवाह शोधन परियोजनाएं कानपुर, उन्नाव, बन्थर, मथुरा और गोरखपुर में संचालित हैं। इनमें मथुरा और कानपुर की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, बन्थर में 70% कार्य पूर्ण हुआ है और उन्नाव तथा गोरखपुर परियोजनाओं की प्रक्रिया प्रगति पर है।

इसके अतिरिक्त घाट और शवदाहगृहों का निर्माण और पुनरुद्धार कार्य भी नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है। प्रयागराज में 7 घाटों का निर्माण महाकुम्भ-2025 के पूर्व पूर्ण किया गया है। फतेहपुर और बलिया में घाट निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। राज्य में अब तक 80 घाट और 15 शवदाहगृह का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। वाराणसी में 26 नहाने वाले घाट और 8 कुंडों का पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण कार्य पूरा हो चुका है। वृन्दावन क्षेत्र में 9 कुंडों के पुनरुद्धार के लिए परियोजना तैयार कर एनएमसीजी को स्वीकृति के लिए भेजी गई है।

राज्य के 25 शहरी निकायों को रिवर सिटी एलाइंस प्लेटफार्म पर बोर्ड किया जा चुका है। कानपुर और अयोध्या के लिए अरबन रिवर मैनेजमेंट प्लान तैयार हो चुका है। इससे पहले बरेली और मुरादाबाद के लिए योजना तैयार की जा चुकी थी। मिर्जापुर, गोरखपुर, बिजनौर, मथुरा-वृन्दावन और शाहजहांपुर के लिए यूआरएमपी तैयार करने का कार्य प्रगति पर है। प्रयागराज हेतु ड्राफ्ट योजना तैयार हो गई है और शीघ्र अंतिम रूप प्रदान कर कार्यवाही की जाएगी।

नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत इन सभी परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य नालों और नदियों में प्रवाहित अपशिष्ट जल का शोधन कर प्रदूषण रोकना है। साथ ही घाटों, शवदाहगृहों और कुंडों का निर्माण एवं पुनरुद्धार भी किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम से गंगा नदी के जल में सुधार और स्वच्छता सुनिश्चित हो रही है, जिससे न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी बल्कि स्थानीय जनमानस को धार्मिक, सामाजिक और स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होंगे।

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