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विश्व रेबीज दिवस पर जागरूकता का संदेश : समय पर टीकाकरण और सावधानी ही बचाव।

विश्व रेबीज दिवस पर जागरूकता का संदेश : समय पर टीकाकरण और सावधानी ही बचाव।

मोहम्मद असलम,‌ संवाददाता 

लखीमपुर खीरी। कुत्ते के काटने की घटनाएं आमतौर पर अक्सर सामने आती रहती हैं, लेकिन इनके गंभीर परिणाम जानलेवा भी हो सकते हैं। इसी कारण प्रत्येक वर्ष 28 सितम्बर को विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति सचेत करना और समय पर बचाव के उपायों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

जिला मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि रेबीज एक घातक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित कुत्ते, बिल्ली, बंदर, सियार और अन्य गर्म रक्त वाले जानवरों की लार से फैलता है। यदि संक्रमित जानवर काटे और समय पर उपचार न मिले तो यह बीमारी निश्चित रूप से जानलेवा सिद्ध होती है।

रेबीज क्या है।

रेबीज ऐसा संक्रमण है जो सीधे मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। संक्रमित जानवर की लार काटने, खरोंचने या खुले घाव से शरीर में पहुंच जाती है।

  • वर्ष 2023 में 69,881
  • वर्ष 2024 में 79,033
  • और वर्ष 2025 में अब तक 54,403

जानवर काटने के मामले दर्ज हुए हैं। हालांकि, जिले में अब तक किसी भी मरीज में रेबीज के लक्षण नहीं पाए गए हैं।

लक्षण जिनसे सावधान रहें।

  • तेज बुखार और सिरदर्द
  • पानी से डर (हाइड्रोफोबिया)
  • हवा से डर (एरोफोबिया)
  • बेचैनी, भ्रम और घबराहट
  • गले की मांसपेशियों में खिंचाव
  • लकवा

विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार जब लक्षण प्रकट हो जाते हैं तो रोगी को बचाना लगभग असंभव हो जाता है और 8–10 दिन के भीतर मृत्यु हो सकती है।

बचाव और रोकथाम के उपाय।

  • काटने के तुरंत बाद घाव को कम से कम 15–20 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोएं।
  • तुरंत स्वास्थ्य केंद्र जाकर एंटी रेबीज वैक्सीन (ARV) लगवाएं।
  • गहरे घाव या खरोंच की स्थिति में रेबीज इम्यूनोग्लोब्यूलिन भी लगवाना जरूरी है।
  • पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण कराएं।
  • बच्चों को समझाएं कि आवारा कुत्तों से दूर रहें।

जिले में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाएं।

सभी सीएचसी व पीएचसी पर एआरवी उपलब्ध है।

शहरी क्षेत्रों के अर्बन पीएचसी, जिला महिला चिकित्सालय और जिला पुरुष चिकित्सालय ओयल में भी यह सुविधा मौजूद है।

जिला पुरुष चिकित्सालय को मॉडल एंटी रेबीज क्लीनिक के रूप में विकसित किया गया है। यहां 24×7 उपचार की व्यवस्था है और यही जनपद की एकमात्र इकाई है जहां रेबीज इम्यूनोग्लोब्यूलिन की सुविधा उपलब्ध है।

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