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ज्ञान यज्ञ महोत्सव के समापन पर संत जियर स्वामी का संदेश-समाज व राष्ट्र हित में झुकना भी श्रेष्ठ गुण।

ज्ञान यज्ञ महोत्सव के समापन पर संत जियर स्वामी का संदेश-समाज व राष्ट्र हित में झुकना भी श्रेष्ठ गुण।

चहनियां (चंदौली)। क्षेत्र के पक्खोपुर स्थित देवनाथपुरी में आयोजित ज्ञान यज्ञ महोत्सव के अंतिम दिन गुरुवार को संत लक्ष्मी प्रपन्न जियर स्वामी ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक एवं नैतिक जीवन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्र और समाज के कल्याण की बात हो तो व्यक्ति को थोड़ा झुक जाना चाहिए, यही सच्ची समझदारी और धर्म है।

संत जियर स्वामी ने प्रवचन के दौरान कहा कि प्रभु का स्मरण सदैव शुद्ध मन और शरीर से करना चाहिए, इसलिए प्रातःकाल स्नान के बिना ईश्वर का ध्यान नहीं करना चाहिए। उन्होंने गरुड़ देव और नागों की पौराणिक कथा का उदाहरण देते हुए समझाया कि वचन पालन और विवेक कितना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि नागों से शर्त हारने के बाद गरुड़ देव की माता को दासी बनना पड़ा था। नागों ने शर्त रखी कि यदि गरुड़ देव इंद्रलोक से अमृत कलश लाकर देंगे, तभी उनकी माता को मुक्त किया जाएगा। अमृत के लिए गरुड़ और इंद्र की सेना में भीषण युद्ध हुआ, जिसमें गरुड़ देव विजयी हुए। वचन निभाते हुए उन्होंने अमृत नागों को सौंपा, लेकिन स्नान-ध्यान और माता की मुक्ति की शर्त रखकर अमृत को मानवता के विनाश से बचा लिया।

संत जियर स्वामी ने कहा कि यदि नाग अमृत पी लेते तो संसार में विनाश मचा देते। इससे यह सीख मिलती है कि विवेक और धर्म से ही संसार का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि यह नश्वर शरीर यहीं छूट जाता है, केवल आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन ईश्वर का भजन करना चाहिए।

महोत्सव के दौरान आयोजक बनारसी यादव, संतोष, दिनेश प्रधान, रणजीत प्रधान, कमलेश, श्याम नारायण, मंटू यादव, कल्लू मौर्य, मोहन, लल्लन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

राजन सिंह, सहयोगी — जयशंकर मिश्रा, संवाददाता

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