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अवैध अस्पताल पर प्रशासन का शिकंजा: जच्चा-बच्चा की मौत के बाद माही हेल्थ केयर सेंटर सील, झोलाछापों में मचा हड़कंप।

अवैध अस्पताल पर प्रशासन का शिकंजा: जच्चा-बच्चा की मौत के बाद माही हेल्थ केयर सेंटर सील, झोलाछापों में मचा हड़कंप।

इस्लामनगर, बदायूं। थाना क्षेत्र के एक अवैध निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की दर्दनाक मौत का मामला जिलाधिकारी के दरबार तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक अमला पूरी तरह हरकत में आ गया है। जिलाधिकारी के कड़े रुख और निर्देश पर गठित स्वास्थ्य विभाग व राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने सहसवान रोड स्थित लालबाग इलाके में संचालित ‘माही हेल्थ केयर सेंटर’ पर छापामार कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में अवैध रूप से क्लीनिक चलाने वाले झोलाछाप डॉक्टरों और फर्जी डॉक्टरों में हड़कंप मच गया है।

बिना पंजीकरण और मानकों के ताक पर चल रहा था मौत का खेल।

प्राप्त विवरण के अनुसार, मोहल्ला हाता निवासी इलयास की 19 वर्षीय पत्नी नरगिश को प्रसव पीड़ा होने पर सहसवान रोड स्थित माही हेल्थ केयर सेंटर में भर्ती कराया गया था। प्रसव के दौरान कथित चिकित्सकों की लापरवाही के चलते नरगिश और उसके नवजात शिशु दोनों की असमय मौत हो गई। इस दोहरी मौत के बाद पीड़ित परिवार में कोहराम मच गया। मामला जब बदायूं के जिलाधिकारी अवनीश कुमार राय के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को तत्काल जांच कर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

प्रशासनिक जांच में खुली पोल, मौके पर ही किया गया सील।

जिलाधिकारी के आदेश के अनुपालन में सीएमओ डॉ. मोहन झा ने तत्काल एक संयुक्त टीम का गठन किया। डिप्टी सीएमओ एवं नोडल अधिकारी डॉ. नवनीत कुमार, विभागीय लिपिक नितिन कुमार तथा नायब तहसीलदार की अगुवाई में टीम ने पुलिस बल के साथ उक्त अस्पताल पर अचानक छापा मारा। सघन जांच के दौरान अधिकारियों के होश उड़ गए; अस्पताल का न तो कोई वैध पंजीकरण मिला और न ही वहां चिकित्सा कार्य के लिए तय आवश्यक मानक मौजूद थे। इतना ही नहीं, अस्पताल में किसी योग्य या डिग्रीधारी चिकित्सक की उपलब्धता भी नहीं पाई गई। गंभीर अनियमितताओं और अवैध संचालन की पुष्टि होते ही टीम ने माही हेल्थ केयर सेंटर को सील कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि बिना मान्यता के अस्पताल चलाने और लापरवाही बरतने के मामले में संचालकों के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।

कार्रवाई की भनक लगते ही शटर गिराकर भागे झोलाछाप।

इस मुख्य अस्पताल को सील करने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक टीम का रुख क्षेत्र में कुकुरमुत्ते की तरह खुले अन्य अवैध क्लीनिकों की तरफ हुआ। टीम ने जैसे ही कस्बा और ग्रामीण इलाकों में संचालित अन्य संदिग्ध क्लीनिकों पर छापेमारी शुरू की, वैसे ही क्षेत्र में खलबली मच गई। कार्रवाई की भनक लगते ही दर्जनों झोलाछाप डॉक्टर अपने-अपने क्लीनिकों और दुकानों के शटर गिराकर मौके से रफूचक्कर हो गए। जांच अधिकारियों ने स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी है कि जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले बिना पंजीकरण के चल रहे अस्पतालों, पैथोलॉजी लैब और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ यह दंडात्मक अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा।

 

 

 

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