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लखीमपुर खीरी: हमारे प्यार का कुछ तो सिला मिले हमको’ – तरही मुशायरे में गूंजे मोहब्बत और अमन के तराने।

हमारे प्यार का कुछ तो सिला मिले हमको’ – तरही मुशायरे में गूंजे मोहब्बत और अमन के तराने।

संवाददाता, मोहम्मद कमर 

लखीमपुर खीरी। साहित्य और शायरी की विरासत को संजोने वाली संस्था ‘बज़्म फ़रोगे अदब’ की ओर से 23वां मासिक तरही मुशायरा पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ। मुशायरे का केंद्र बिंदु निर्धारित मिसरा-ए-तरह “हमारे प्यार का कुछ तो सिला मिले हमको” रहा, जिस पर जिले के प्रबुद्ध शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रेम, सामाजिक सरोकार और इंसानियत का संदेश दिया।

मुशायरे की अध्यक्षता करते हुए आमिर रज़ा ने अपनी शायरी के माध्यम से महफिल में जान डाल दी। उन्होंने अपने कलाम “हमारे प्यार का कुछ तो सिला मिले हमको, जो प्यार दे नहीं सकते तो हमको नफरत दो” के जरिए श्रोताओं से खूब दाद बटोरी। संचालन करते हुए इलियास चिश्ती ने अपने अंदाज-ए-बयां से कार्यक्रम को अंत तक बांधे रखा।

मुशायरे में विभिन्न शायरों ने अपने अशआर के जरिए समाज को आईना दिखाया। डॉ. एहराज अरमान ने नफरत मिटाने की बात कही, तो सलमान रिज़वी ने प्रेम और समर्पण को अपने शब्दों में पिरोया। वहीं, नसीम सीतापुरी ने नई पीढ़ी में स्वाभिमान जगाने और सैफुल इस्लाम ने बच्चों की संतुलित परवरिश पर जोर दिया। अय्यूब अंसारी ने मोहब्बत और सियासत के अंतर्संबंधों को रेखांकित किया, तो हसन अंसारी ने देश में अमन और शांति बनाए रखने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का आगाज वाहिद अली वाहिदी द्वारा पेश की गई नात-ए-पाक से हुआ। बज़्म फ़रोगे अदब के पदाधिकारियों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था का उद्देश्य उर्दू अदब और सांस्कृतिक परंपराओं को आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाना है। देर रात तक चले इस साहित्यिक आयोजन में मौजूद श्रोताओं ने ‘वाह-वाह’ और ‘मुकर्रर’ के साथ शायरों का उत्साहवर्धन किया।

 

 

 

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