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बदायूँ: गन्ना मूल्य भुगतान में ऐतिहासिक वृद्धि, किसानों के बैंक खातों में पहुँचे 1173 करोड़ रुपये।

सांकेतिक चित्र (AI द्वारा निर्मित)

बदायूँ: गन्ना मूल्य भुगतान में ऐतिहासिक वृद्धि, किसानों के बैंक खातों में पहुँचे 1173 करोड़ रुपये।

बदायूँ: जनपद बदायूँ में गन्ना किसानों के लिए बीते कुछ वर्ष आर्थिक समृद्धि और खुशहाली का नया पैगाम लेकर आए हैं। सरकारी आंकड़ों के तुलनात्मक विश्लेषण से यह सुखद तस्वीर साफ हुई है कि प्रदेश सरकार की किसान-हितैषी नीतियों के चलते गन्ना मूल्य भुगतान में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जहाँ मार्च 2012 से मार्च 2017 की पाँच वर्षीय अवधि में जनपद के 84,509 किसानों को लगभग 673.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, वहीं अप्रैल 2017 से दिसंबर 2025 तक के कालखंड में यह संख्या और धनराशि दोनों में भारी उछाल आया है। इस दौरान लाभान्वित किसानों की संख्या बढ़कर 1,32,450 तक पहुँच गई है और उन्हें कुल 1173.34 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड तोड़ भुगतान सीधा उनके खातों में भेजा गया है। यह वृद्धि न केवल समयबद्ध भुगतान प्रणाली को दर्शाती है, बल्कि किसानों के जीवन स्तर में आए व्यापक सुधार का भी प्रमाण है।

गन्ना मूल्य भुगतान की यह ऐतिहासिक सफलता पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) का ही परिणाम है, जिसने बिचौलियों की भूमिका खत्म कर दी है। पहले जहाँ किसानों को अपनी गाढ़ी कमाई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब भुगतान प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाया गया है। इसके साथ ही, जनपद में गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रचार-प्रसार, उन्नत बीजों की उपलब्धता और बेहतर सिंचाई सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।

गन्ना सर्वेक्षण से लेकर पर्ची वितरण प्रणाली तक को पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है, जिससे किसानों को होने वाली असुविधाओं पर लगाम लगी है। प्रशासन और चीनी मिलों के बीच बेहतर समन्वय के कारण अब भुगतान में होने वाली देरी को न्यूनतम किया गया है, जिसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के रूप में दिखाई दे रहा है।

किसानों की बढ़ी हुई क्रय शक्ति ने स्थानीय बाजारों में भी नई जान फूँक दी है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों में सकारात्मक बदलाव आया है। प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि किसानों को उनके श्रम का पूरा मूल्य बिना किसी बाधा के समय पर मिले, इसके लिए संबंधित विभागों को निरंतर सतर्क रहने और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। किसानों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर उनकी छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया जा रहा है। भविष्य में भी गन्ना किसानों के हितों की रक्षा और उनकी आय को दोगुना करने की दिशा में इसी प्रकार के ठोस प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है, ताकि बदायूँ का अन्नदाता सशक्त और आत्मनिर्भर बना रहे।

 

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