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राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड निस्तारण, 1 लाख 39 हजार से अधिक वाद हुए सुलझाए।

राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड निस्तारण, 1 लाख 39 हजार से अधिक वाद हुए सुलझाए।

मुबारक अली, संवाददाता

शाहजहांपुर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देश पर शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शाहजहांपुर के तत्वावधान में दीवानी न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च न्यायालय इलाहाबाद के प्रशासनिक न्यायमूर्ति दीपक वर्मा ने की। इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष विष्णु कुमार शर्मा सहित न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ओम प्रकाश मिश्र तृतीय ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकृति के कुल 1,39,518 वादों का निस्तारण किया गया।

लोक अदालत के दौरान विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन 12,336 वादों का निस्तारण करते हुए 6,71,78,184 रुपये की धनराशि जुर्माने के रूप में वसूल की गई। इसके अतिरिक्त विभिन्न राजस्व न्यायालयों द्वारा 1,20,783 राजस्व वादों का निस्तारण किया गया।

ऑनलाइन चालानी से संबंधित 5,078 मामलों का निस्तारण कर 11,78,400 रुपये शमन शुल्क वसूल किया गया। वहीं विभिन्न बैंकों की लोन रिकवरी से जुड़े 1,317 प्री-लिटिगेशन वादों में समझौता कराते हुए 9,15,71,700 रुपये की ऋण धनराशि का निस्तारण कराया गया।

प्राचीनतम वादों के निस्तारण की बात करें तो अपर सिविल जज (सीडी/एसीजेएम) कक्ष संख्या-20 श्रीमती अवंतिका प्रभाकर द्वारा वर्ष 1993 के 32 वर्ष पुराने तीन वाद, वर्ष 1996 का 29 वर्ष पुराना एक वाद निस्तारित किया गया। सिविल जज जूनियर डिवीजन कक्ष संख्या-18 श्रीमती हिना कौसर द्वारा वर्ष 2012 का 13 वर्ष पुराना एक वाद, जबकि सिविल जज जूनियर डिवीजन तिलहर सुमित गुप्ता प्रथम द्वारा पांच वर्ष पुराने तीन वादों का निस्तारण किया गया।

जनपद एवं सत्र न्यायाधीश विष्णु कुमार शर्मा द्वारा तीन फौजदारी वाद, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी मोहम्मद रिजवान द्वारा 83 मोटर दुर्घटना वादों का निस्तारण कर 5,71,34,400 रुपये प्रतिकर दिलाए जाने का आदेश पारित किया गया।

पारिवारिक न्यायालय द्वारा 12 वैवाहिक जोड़ों के बीच आपसी विवाद सुलझाकर उन्हें साथ रहने के लिए राजी किया गया। प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय नरेन्द्र कुमार तृतीय द्वारा 30 फौजदारी व 23 वैवाहिक वाद, जबकि अपर प्रधान न्यायाधीश श्रीमती यासमीन अकबर द्वारा 13 वैवाहिक वादों का निस्तारण किया गया।

इसके साथ ही राष्ट्रीय लोक अदालत में जिला कारागार के बंदियों एवं राजकीय बालगृह (शिशु एवं बालक) द्वारा हस्तनिर्मित उत्पादों की स्टॉल लगाकर प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसे लोगों ने सराहा।

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