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सहसवान पुलिस पर गंभीर आरोप – दबंगों से मिलीभगत कर गरीब किसान को किया प्रताड़ित, मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार।

सहसवान पुलिस बनी अपराधियों की ढाल! — सहसवान थाने के भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा।

पीड़ित बोला “शराब पिलाने वालों की सुनती है पुलिस, गरीब की नहीं!”

बदायूँ। जनपद बदायूँ के थाना सहसवान की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम डकारा पुख्ता निवासी एक गरीब किसान ने आरोप लगाया है कि थाने की मिलीभगत से दबंगों ने उसके खेत के सैकड़ों पेड़ काट डाले, और जब उसने न्याय माँगा तो उसे ही गालियाँ, धमकियाँ और झूठे मुकदमे की चेतावनी मिली।

किसान कृष्ण मुरारी पुत्र वासुदेव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर सहसवान थाने के पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार, दबंगों से सांठगांठ और अत्याचार के संगीन आरोप लगाए हैं।

“न्याय मांगना बना अपराध” — 400 से अधिक पेड़ अवैध रूप से काटे गए।

पीड़ित के अनुसार, गांव के ही रामबहादुर पुत्र प्रकाश, कालीचरण और सुगढ़पाल पुत्र रतनपाल ने पुलिस की मिलीभगत से उसके खेत में खड़े लगभग 400 से 500 यूकेलिप्टस के पेड़ों की कटाई करवा दी, जिनकी कीमत करीब पांच लाख रुपये थी।

जब कृष्ण मुरारी ने विरोध किया, तो 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुँची, पर कार्रवाई करने के बजाय किसान को थाने बुला लिया गया।

थाने में हुआ अपमान — “शराब पिलाने वालों की सुनते हैं, तू कौन है?”

थाने पहुँचने के बाद जो हुआ, उसने पुलिस की छवि पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया।

कृष्ण मुरारी का आरोप है कि थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसका मोबाइल छीन लिया, और गालियां देते हुए कहा — “तू सड़क छाप आदमी है! इन इज्जतदार लोगों पर आरोप लगाता है? ये लोग हमें रोज़ खाना और महंगी शराब पिलाते हैं! ज़्यादा नेता बना तो तुझ पर बलात्कार का केस लगवाकर जेल भेज देंगे!”

पीड़ित के मुताबिक, थाने में बैठे अफसरों ने दबंगों के पक्ष में बात करते हुए उसे “समझौता करने” का दबाव बनाया। जब उसने इनकार किया, तो जेल भेजने और गांव छोड़ने की धमकी दी गई।

पांच लाख का नुकसान – लेकिन पुलिस को बस “शराब” की चिंता!

कृष्ण मुरारी ने बताया कि दबंग रोजाना पुलिस को शराब और खाना पहुंचाते हैं, और इसी “रिश्ते” के कारण थाने में उनकी पूरी पकड़ है।

क्षेत्र में गौ-तस्करी, अवैध कटान, लूटपाट और चोरी जैसी घटनाएं आम हैं, लेकिन पुलिस की प्राथमिकता सिर्फ “सेवा और सप्लाई” करने वालों तक सीमित है।

CO सहसवान पर भी आरोप – “समझौता करो, वरना अंजाम भुगतो”

पीड़ित ने बताया कि उसने 07 अक्टूबर 2025 को थाना सहसवान में तहरीर दी थी, लेकिन कोई FIR दर्ज नहीं हुई।

बाद में जब वह क्षेत्राधिकारी (CO) सहसवान के पास पहुंचा, तो वहां से भी उसे कहा गया कि “समझौता कर लो, वरना तुम्हारे लिए हालात खराब हो जाएंगे।”

अब कृष्ण मुरारी अपने परिवार सहित भयभीत है। उसका कहना है कि दबंग और पुलिसकर्मी दोनों ही मिलकर किसी भी वक्त उसके साथ अनहोनी कर सकते हैं।

ग्रामीणों में आक्रोश – “सहसवान थाने में नहीं कानून, वसूली का राज चलता है”

गांव के ग्रामीणों ने खुलकर कहा कि थाना सहसवान अब न्याय का नहीं, वसूली का केंद्र बन चुका है।

ग्रामीणों का आरोप है कि “गरीब की कोई सुनवाई नहीं होती, जबकि जिनके घर से रोज़ शराब और बिरयानी की सप्लाई जाती है, उनके लिए पुलिस हमेशा तत्पर रहती है।”

लोगों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरा थाना स्टाफ निलंबित किया जाए और SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) से जांच कराई जाए।

अब सवाल उठता है– कब गिरेगी गाज भ्रष्ट पुलिस पर?

बदायूँ जिले में यह मामला अब चर्चा का केंद्र बन गया है। जनता का कहना है कि जब कानून के रखवाले ही अपराधियों के साथी बन जाएं, तो फिर आम नागरिक किससे सुरक्षा की उम्मीद रखे?

अब निगाहें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीजीपी पर हैं —

क्या सहसवान थाने पर कार्रवाई होगी, या यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा?

बाइट- पीड़ित।

प्रार्थना पत्र 

 

 

 

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