Breaking News

सहसवान में खाद वितरण में धांधली का खेल, किसानों से लूट पर प्रशासन मौन!

ग्रामीण सहकारी समिति जहांगीराबाद के सचिव पर ओवररेटिंग, जबरन नेनो यूरिया थमाने और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप।

किसानों ने कहा — “सरकार सब्सिडी देती है, लेकिन हमसे वसूला जा रहा है डबल दाम”

सहसवान, (बदायूं)। सहसवान नगर की ग्रामीण सहकारी समिति जहांगीराबाद में खुलेआम किसानों के साथ लूट और मनमानी का खेल जारी है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी तमाशबीन बने बैठे हैं। किसानों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है जैसे वे किसी सरकारी योजना के लाभार्थी नहीं, बल्कि किसी प्राइवेट दुकान के ग्राहक हों!

ग्रामीण क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने समिति के सचिव पर खाद और डीएपी की बिक्री में अनियमितता, ओवररेटिंग और जबरन बिक्री के गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा तय दरों पर खाद देने के बजाय सचिव उनसे अधिक मूल्य वसूल रहा है और हर किसान को 225 रुपये की नेनो यूरिया की बोतल जबरन थमाई जा रही है।

जो किसान नेनो यूरिया लेने से मना करते हैं, उन्हें खाद और डीएपी देने से मना कर दिया जाता है।

किसानों ने बताया कि सचिव खुलेआम कहता है — “नेनो यूरिया लो वरना खाद नहीं मिलेगी।”

इस मनमानी के चलते गरीब और सीमांत किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं।

अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती शिकायतें।

किसानों ने बताया कि जब उन्होंने इस पूरे खेल की शिकायत करने की कोशिश की तो सचिव ने अधिकारियों के संपर्क सूत्र तक मिटा दिए। किसी किसान को यह तक नहीं पता कि शिकायत आखिर किससे करें।

कई किसानों का कहना है कि समिति पर बैठे अधिकारी और सचिव की मिलीभगत से यह खेल लंबे समय से चल रहा है। प्रशासन की चुप्पी से यह साफ हो गया है कि खाद वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार ने गहरी जड़ें जमा ली हैं।

“खाद नहीं मिलेगी तो बुवाई कैसे होगी?”

खेती के सीजन में खाद किसानों के लिए जीवनरेखा की तरह होती है, लेकिन यहां तो किसानों को उनके ही हक से वंचित किया जा रहा है। किसान मजबूरी में महंगे दामों पर नेनो यूरिया खरीद रहे हैं ताकि उनकी फसल बर्बाद न हो। कई किसानों ने बताया कि देर से वितरण और सीमित मात्रा में खाद मिलने के कारण उनकी बुवाई प्रभावित हो रही है।

किसानों में गुस्सा, कार्रवाई की मांग।

किसानों में इस धांधली को लेकर भारी आक्रोश है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि समिति के सचिव के खिलाफ जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए और किसानों को उचित दर पर खाद व डीएपी उपलब्ध कराई जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे सामूहिक रूप से धरना-प्रदर्शन करने को विवश होंगे।

अब सवाल यह है — जब किसानों की लूट की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो कृषि विभाग और सहकारी विभाग के अधिकारी आखिर किसके इशारे पर चुप हैं?

क्या प्रशासन तब जागेगा जब किसान सड़क पर उतरेंगे?

बाइट- किसान 

Spread the love

Check Also

बदायूं: राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर अधिकारियों की बैठक आयोजित, 12 सितंबर को होगा आयोजन।

राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर अधिकारियों की बैठक आयोजित, 12 सितंबर को होगा …