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शोपीस बनकर रह गया कूड़ा घर, जिम्मेदारों की लापरवाही से ध्वस्त हुआ स्वच्छ भारत का सपना।

शोपीस बनकर रह गया कूड़ा घर, जिम्मेदारों की लापरवाही से ध्वस्त हुआ स्वच्छ भारत का सपना।

घूरेलाल कन्नौजिया, ब्यूरो चीफ चन्दौली 

चहनियां (चंदौली)। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत–सुंदर भारत अभियान के तहत करोड़ों की योजनाएं धरातल पर केवल दिखावा बनकर रह गई हैं। ग्राम पंचायत निधि और मनरेगा से बनाए गए कूड़ा घर व खाद गड्ढे आज बेकार पड़े हैं। आलम यह है कि मझीलेपुर गांव में पंचायत भवन के बगल में बना कूड़ा घर लोगों के ताश खेलने का अड्डा बन गया है, लेकिन उसमें कभी कूड़ा नहीं फेंका गया।

जानकारी के अनुसार शासन की पहल पर ब्लॉक के कई गांवों में कूड़ा घरों का निर्माण कराया गया और लाखों रुपये खर्च कर कूड़ा उठाने की गाड़ियां खरीदी गईं। लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते न तो इन कूड़ा घरों का उपयोग हो पाया और न ही खाद गड्ढों से खाद बन सकी।

ग्राम प्रधान नरेंद्र कुमार का कहना है कि गांव में सफाई कर्मी की संख्या बेहद कम है। “हमारे यहां एक ही सफाईकर्मी नवीन कुमार तैनात हैं, जो महीने में आधे दिन रोस्टर की बात कहकर गायब रहते हैं। जब गांव में नियमित सफाई ही नहीं होती तो कूड़ा एकत्र कहां से होगा और फेंका कहां जाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि कूड़ा उठाने के लिए खरीदी गई गाड़ी को चलाने के लिए अब तक चालक तक नियुक्त नहीं किया गया है। ऐसे में कूड़ा निस्तारण केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही संबंधित विभाग और जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं देंगे तो स्वच्छ भारत मिशन केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगा। लोग साफ–सफाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन योजनाएं निष्प्रभावी साबित हो रही हैं।

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