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तहसील परिसर में अग्निशमन विभाग की मॉक ड्रिल, कर्मचारियों को दी गई आपदा प्रबंधन की व्यवहारिक ट्रेनिंग।

तहसील परिसर में अग्निशमन विभाग की मॉक ड्रिल, कर्मचारियों को दी गई आपदा प्रबंधन की व्यवहारिक ट्रेनिंग।

सहसवान (बदायूं)। आपदा प्रबंधन को लेकर प्रशासन लगातार सजग और सक्रिय दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को सहसवान तहसील परिसर में अग्निशमन विभाग द्वारा एक विशेष मॉक ड्रिल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य यह था कि सरकारी कार्यालयों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी किसी भी अग्निकांड अथवा आपदा की स्थिति में घबराने की बजाय त्वरित और प्रभावी कदम उठाना सीख सकें।

एसडीएम और सीओ की मौजूदगी में हुआ आयोजन।

कार्यक्रम का नेतृत्व उपजिलाधिकारी साईं आश्रित शाखमुरी ने किया। उनके साथ क्षेत्राधिकारी कर्मवीर सिंह, थाना प्रभारी राजेंद्र बहादुर सिंह तथा तहसीलदार समेत पूरा प्रशासनिक अमला मौजूद रहा। सभी अधिकारियों ने कर्मचारियों को मॉक ड्रिल की महत्ता समझाई और यह बताया कि समय रहते सही कदम उठाने से बड़े हादसों को रोका जा सकता है।

अग्निशमन टीम ने किया लाइव प्रदर्शन।

अग्निशमन प्रभारी पी.एल. सोलंकी अपनी टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने व्यवहारिक रूप से आग लगाकर अभ्यास किया और दिखाया कि किस प्रकार आपातकालीन हालात में अग्निशमन उपकरणों का उपयोग करना चाहिए।

कर्मचारियों को फायर एक्सटिंग्विशर का सही प्रयोग सिखाया गया।

  • सुरक्षित निकासी (Evacuation) की प्रक्रिया समझाई गई।
  • आपदा की स्थिति में घायलों को दिए जाने वाले प्राथमिक उपचार (First Aid) के महत्व पर जोर दिया गया।

तहसील के कर्मचारियों ने पूरे उत्साह के साथ इस मॉक ड्रिल में भाग लिया। उन्होंने उपकरणों को प्रत्यक्ष रूप से देखा, उनसे जुड़ी तकनीकी जानकारियां हासिल कीं और मौके पर सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाएं भी शांत कीं।

जागरूकता और निर्णय क्षमता में होगा इज़ाफा।

अग्निशमन प्रभारी पी.एल. सोलंकी ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल से न केवल जागरूकता बढ़ती है, बल्कि कर्मचारी या आम नागरिक आपदा की घड़ी में घबराने की बजाय समझदारी और संयम के साथ सही निर्णय ले पाते हैं। यही प्रशिक्षण जीवन और संपत्ति दोनों की सुरक्षा में सहायक बनता है।

स्थानीय स्तर पर बढ़ेगी सुरक्षा व्यवस्था।

इस कार्यक्रम से न केवल तहसील परिसर के कर्मचारियों को प्रशिक्षण मिला बल्कि आमजन को भी यह संदेश गया कि आपदा कभी बताकर नहीं आती, इसलिए हमेशा सतर्क रहना और आवश्यक प्रशिक्षण लेना बेहद जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम समय-समय पर अन्य सार्वजनिक स्थानों और संस्थानों में भी कराए जाएंगे ताकि किसी भी आकस्मिक घटना से निपटा जा सके।

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