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गुलडिया में दबंगों के हौसले बुलंद: पीड़ित दुकानदार के साथ दो बार मारपीट और तमंचे लहराने का आरोप, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल।

गुलडिया में दबंगों के हौसले बुलंद: पीड़ित दुकानदार के साथ दो बार मारपीट और तमंचे लहराने का आरोप, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल।

संवाददाता, शैलेन्द्र सिंह 

बदायूं। थाना मूसाझाग क्षेत्र के अंतर्गत नगर पंचायत गुलड़िया (टाउन एरिया) में कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए दबंगों द्वारा एक पीड़ित परिवार पर लगातार हमला करने और जान से मारने की धमकी देने का बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि थाने में बार-बार लिखित शिकायत और डायल 112 पर कॉल करने के बावजूद मूसाझाग पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। पुलिस की इस कथित निष्क्रियता के चलते क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं और लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या पुलिस किसी बड़ी अनहोनी या बड़ी घटना के घटित होने का इंतजार कर रही है।

पूरा मामला बीते 15 मई की रात का है, जब नगर पंचायत गुलड़िया निवासी पीड़ित कल्याण सिंह पुत्र महेंद्र सिंह अपनी दुकान पर बैठे हुए थे। आरोप है कि इसी दौरान गांव का ही रहने वाला सनी पुत्र जयपाल अत्यधिक शराब के नशे में धुत होकर वहां पहुंचा और पीड़ित को सरेराह गंदी-गंदी गालियां देने लगा।

जब कल्याण सिंह और आसपास मौजूद अन्य लोगों ने उसे इस हरकत से मना किया, तो आरोपी हाथापाई पर उतर आया और मारपीट शुरू कर दी, जिससे पीड़ित के कपड़े भी फट गए। उस वक्त पीड़ित ने तुरंत डायल 112 पुलिस को सूचना दी और अगले दिन 16 मई को थाने जाकर नामजद तहरीर भी सौंपी, लेकिन आरोप है कि पुलिस की तरफ से जांच के लिए मौके पर कोई नहीं पहुंचा।

पुलिस की ढिलाई से बेखौफ आरोपियों के हौसले इतने बढ़ गए कि उन्होंने अगले ही दिन फिर से वारदात को अंजाम दे डाला। पीड़ित के मुताबिक, 17 मई को आरोपी सनी अपने साथ 6 से 7 अज्ञात लड़कों को लेकर मय असलहों (हथियारों) के साथ दोबारा दुकान पर आ धमका। दबंगों ने आते ही गाली-गलौज शुरू कर दी और जब विरोध किया गया, तो उन्होंने कल्याण सिंह, उनकी पत्नी और उनके छोटे बेटे को बेरहमी से पीट दिया।

दोबारा 112 नंबर बुलाने पर उन्हें थाने जाने की सलाह दी गई, जिस पर पीड़ित ने 17 मई को फिर से थाने में तहरीर दी। लगातार दो दिन तक असलहे लहराकर हुई मारपीट के बाद भी पुलिस की ओर से कोई सुरक्षा या कार्रवाई न मिलने से पीड़ित का पूरा परिवार इस समय गहरे खौफ के साए में जीने को मजबूर है। अब देखना यह है कि पीड़ित परिवार की इस गुहार पर मूसाझाग थाना पुलिस कब जागती है और पीड़ित को क्या न्याय दिला पाती है।

 

 

 

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