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भगवान हनुमान जी की पूरी कथा – जन्म से लेकर संकटमोचक बनने तक।

भगवान हनुमान जी की पूरी कथा – जन्म से लेकर संकटमोचक बनने तक।

हनुमान जी का जन्म।

पुराणों के अनुसार त्रेता युग में केसरी नामक वानरराज और उनकी पत्नी अंजनी को पुत्र रत्न प्राप्त हुआ। अंजनी माता भगवान शिव की परम भक्त थीं और वर्षों तक तपस्या करती रहीं। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि उनका पुत्र असाधारण शक्ति से संपन्न होगा।

इसी वरदान से हनुमान जी का जन्म हुआ। हनुमान जी को “पवनपुत्र” भी कहा जाता है क्योंकि उनके जन्म में वायु देव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जब माता अंजनी को फल स्वरूप शिवांश प्राप्त होना था, तब वायु देव ने दिव्य आशीर्वाद स्वरूप वह शक्तियाँ अंजनी को प्रदान कीं।

 

बाल्यकाल की अद्भुत घटनाएँ

1. सूर्य को फल समझकर निगलने की घटना

जब हनुमान जी छोटे थे, तो उन्हें हर चमकती वस्तु फल जैसी प्रतीत होती थी। एक दिन प्रातःकाल उन्होंने आकाश में तेजस्वी सूर्य को देखा और उसे लाल फल समझ लिया। भूख से व्याकुल होकर वे आकाश में उछल पड़े और सूर्य को निगलने की कोशिश करने लगे।

इससे पूरी सृष्टि अंधकारमय हो गई। देवता चिंतित हो उठे। इंद्रदेव ने अपना वज्र फेंककर हनुमान जी को मूर्छित कर दिया। यह देखकर वायु देव क्रोधित हो गए और उन्होंने धरती से वायु प्रवाह रोक दिया। प्राणवायु बंद होने से सभी जीव-जंतु कष्ट में आ गए।

अंततः ब्रह्मा जी और देवताओं ने हस्तक्षेप कर हनुमान जी को जीवनदान दिया और उन्हें अमरता, असीम बल, विद्या और वीरता का वरदान दिया। तभी से वे “अजर-अमर, संकटमोचक और पराक्रमी” कहलाए।

2. ऋषियों का शाप और विस्मृति

बाल्यकाल में हनुमान जी अपनी शक्तियों का खेल-खेल में अत्यधिक प्रयोग करते थे। कभी पर्वत उखाड़ लाते, कभी ऋषियों के यज्ञ में बाधा डाल देते। अंततः ऋषियों ने उन्हें शाप दिया कि वे अपनी शक्तियों को भूल जाएँगे और तभी याद करेंगे जब कोई उन्हें याद दिलाएगा।

इसी कारण हनुमान जी को अपनी महाशक्ति का स्मरण तभी हुआ जब जाम्बवन्त जी ने समुद्र पार करने के समय उनकी शक्ति का स्मरण कराया।

 

युवावस्था और रामभक्ति

1. श्रीराम से भेंट

जब रावण ने सीता माता का हरण किया, तब श्रीराम और लक्ष्मण माता सीता की खोज में निकले। तभी उनकी भेंट हनुमान जी से हुई। हनुमान जी ने पहली बार प्रभु श्रीराम को देखा और तुरंत उनके चरणों में गिर पड़े। उन्होंने जीवनभर के लिए श्रीराम की सेवा का व्रत ले लिया।

2. अशोक वाटिका में सीता माता से मिलना

रामकथा के सबसे महत्वपूर्ण प्रसंगों में से एक – हनुमान जी का समुद्र पार कर लंका पहुँचना। उन्होंने विशालकाय स्वरूप धारण कर समुद्र लांघा और अशोक वाटिका में जाकर माता सीता को श्रीराम का संदेश और मुद्रिका दी। उन्होंने रावण की लंका में भीषण उत्पात मचाया और लंका दहन कर दी।

 

युद्धकालीन पराक्रम

1. संजीवनी बूटी लाना

युद्ध में जब लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए, तब हनुमान जी हिमालय से संजीवनी बूटी लाए और लक्ष्मण जी का जीवन बचाया। यह उनका सबसे महान कार्य माना जाता है।

2. अहिरावण का वध

युद्ध के दौरान रावण के भाई अहिरावण ने छल से राम और लक्ष्मण का अपहरण कर लिया और पाताल लोक ले गया। हनुमान जी वहाँ पहुँचे और अहिरावण का वध करके प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराया।

 

शिक्षा और महत्व

हनुमान जी केवल बल और पराक्रम के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे भक्ति, विनम्रता और निष्ठा के भी आदर्श हैं।

वे हमें सिखाते हैं कि शक्ति का उपयोग धर्म और न्याय की रक्षा के लिए होना चाहिए।

भक्ति यदि निष्काम और निस्वार्थ हो, तो ईश्वर स्वयं भक्त का साथ देते हैं।

हनुमान जी संकटों में सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं, इसलिए उन्हें संकटमोचक कहा जाता है।

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