Breaking News

मनरेगा योजना में मशीनी भ्रष्टाचार: गांव भूढ़िया गोदीनगला में जेसीबी चला कर उड़ाई जा रही नियमों की धज्जियां।

मनरेगा योजना में मशीनी भ्रष्टाचार: गांव भूढ़िया गोदीनगला में जेसीबी चला कर उड़ाई जा रही नियमों की धज्जियां।

राष्ट्रीय न्यूज़ टुडे 

सहसवान, (बदायूं)। जनपद बदायूं के सहसवान ब्लॉक क्षेत्र के गांव भूढ़िया गोदीनगला में शासन की बहुचर्चित मनरेगा योजना को पूरी तरह दरकिनार करते हुए सड़क निर्माण कार्य में खुलेआम मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मनरेगा का उद्देश्य था कि ग्रामीण क्षेत्र के श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिले और वे अपने गांव में ही सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें। लेकिन गांव भूढ़िया गोदीनगला में स्थिति इसके ठीक उलट है। यहां मजदूरों को काम देने के बजाय भारी भरकम जेसीबी मशीनों को काम पर लगा दिया गया है, और दिन-रात मशीनों से मिट्टी डालकर सड़क का निर्माण किया जा रहा है।

यह निर्माण गांव भूढ़िया गोदीनगला से गेंचुलिया संपर्क मार्ग तक किया जा रहा है। जिस योजना से गरीबों को रोजगार मिलना था, उसी योजना में अब मशीनें उनके हिस्से की रोटी निगल रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस कार्य में न तो कोई मज़दूर लगाए गए हैं और न ही कार्यस्थल पर कोई निगरानी व्यवस्था है। मज़दूरों की जगह मशीनें लगाकर योजनाओं का पैसा यूं ही बहाया जा रहा है, और जो गरीब अपने घर पर रोजगार की उम्मीद लगाए बैठा था, उसके हाथ खाली के खाली हैं।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि मनरेगा जैसी योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही की जगह अब मनमानी और मिलीभगत का बोलबाला हो गया है। मजदूरों की बजाय मशीनों से काम कराना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है बल्कि गरीबों के हक पर डाका डालने जैसा है। मनरेगा के अंतर्गत हर कार्यस्थल पर सूचना पट्ट, मस्टररोल, श्रमिकों की उपस्थिति और तकनीकी अधिकारियों की निगरानी अनिवार्य होती है, लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा है। सड़क बन रही है, बजट खर्च हो रहा है, लेकिन मजदूर गायब हैं।

ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण को घोटाले की शुरुआत बताया है और प्रशासन से तत्काल इस पर संज्ञान लेकर जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे सामूहिक रूप से उच्च अधिकारियों और शासन तक शिकायत पहुंचाएंगे। यह मामला केवल एक सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना जैसे बड़े और महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की आत्मा को कुचलने जैसा है।

सवाल यह है कि जब शासन की योजनाएं कागजों से निकलकर ज़मीन पर आती हैं तो क्या यही हाल होना तय है? गरीब के हिस्से का रोजगार मशीन को दे दिया जाए और अफसर आंख मूंद लें — यह कैसा विकास है? गांव भूढ़िया गोदीनगला के ग्रामीणों की यह आवाज़ अब सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि एक सवाल बन चुकी है: मनरेगा का असली लाभ किसे मिल रहा है — मजदूरों को या मशीन मालिकों को?

Spread the love

Check Also

कासगंज: सोरों में जुआरियों पर पुलिस का शिकंजा, 1 लाख से अधिक की नकदी और 5 बाइक बरामद।

कासगंज: सोरों में जुआरियों पर पुलिस का शिकंजा, 1 लाख से अधिक की नकदी और …

error: Content is protected !!