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लखीमपुर खीरी: ‘मनक़बती मुशायरे’ में गूँजे इमाम हुसैन की अज़मत के तराने, शायरों ने पेश की अकीदत।

लखीमपुर खीरी: ‘मनक़बती मुशायरे’ में गूँजे इमाम हुसैन की अज़मत के तराने, शायरों ने पेश की अकीदत।

संवाददाता, मोहम्मद कमर 

लखीमपुर खीरी: मदरसा सुल्ताने हिन्द, शेख़ सराएँ में ‘बज़्म फ़रोग़-ए-अदब’ की मासिक अदबी नशिस्त के तहत एक भव्य ‘मनक़बती मुशायरे’ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शख्सियत, उनके त्याग और पैग़ाम-ए-कर्बला के प्रति समर्पित रहा, जिसमें जिले भर से आए नामचीन शायरों और अदबी हस्तियों ने शिरकत की।

मुशायरे का आगाज़ तिलावत-ए-कुरआन और नात-ए-पाक से हुआ। कार्यक्रम की सदारत करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कर्बला की कुर्बानी केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा का शाश्वत संदेश है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इमाम हुसैन का पैग़ाम किसी एक मज़हब तक सीमित न होकर पूरी इंसानियत के लिए एक मिसाल है, जो ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाने की प्रेरणा देता है।

मुशायरे में शायरों ने अपने कलाम के ज़रिए इमाम हुसैन की शान में अकीदत के फूल पेश किए। किसी ने कर्बला की प्यास को अल्फाज़ दिए, तो किसी ने हक़ और बातिल की जंग का ज़िक्र करते हुए इंसानियत की रक्षा का संदेश दिया। श्रोताओं ने शायरों के उम्दा अशआर पर ज़ोरदार दाद देकर महफ़िल को रूहानी रंग में सराबोर कर दिया। उपस्थित विद्वानों ने कहा कि आज के दौर में जब नफ़रत बढ़ रही है, इमाम हुसैन की शिक्षाओं को अपनाकर समाज को बेहतर बनाया जा सकता है।

‘बज़्म फ़रोग़-ए-अदब’ के आयोजकों ने बताया कि इस मासिक नशिस्त का मुख्य उद्देश्य उर्दू अदब के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ नई पीढ़ी को इतिहास और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को सकारात्मक दिशा देते हैं। देर रात तक चली इस अदबी महफ़िल का समापन सभी मेहमानों और शायरों के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ हुआ।

 

 

 

 

 

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