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लखीमपुर खीरी: अवैध मिट्टी खनन के दौरान टीला ढहने से मजदूर की दर्दनाक मौत, सवालों के घेरे में प्रशासन की कार्यप्रणाली।

लखीमपुर खीरी: अवैध मिट्टी खनन के दौरान टीला ढहने से मजदूर की दर्दनाक मौत, सवालों के घेरे में प्रशासन की कार्यप्रणाली।

संवाददाता, मोहम्मद कमर 

लखीमपुर खीरी: जिले के कोतवाली सदर क्षेत्र अंतर्गत रामापुर चौकी इलाके में शुक्रवार को अवैध मिट्टी खनन के दौरान हुए एक दर्दनाक हादसे में मजदूर पंकज की जान चली गई। मिट्टी का टीला अचानक ढह जाने से सलेमपुर निवासी पंकज मलबे के नीचे दब गया, और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद जब उसे बाहर निकाला गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस हृदयविदारक घटना ने क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे अवैध खनन के काले कारोबार और इसे नजरअंदाज करने वाले प्रशासनिक तंत्र की पोल खोलकर रख दी है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि रामापुर क्षेत्र में लंबे समय से जेसीबी मशीनों और दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रालियों के जरिए बेखौफ मिट्टी का अवैध खनन किया जा रहा है, लेकिन संबंधित विभाग और स्थानीय पुलिस इस पर मौन साधे बैठी रही। ग्रामीणों के अनुसार, घटनास्थल रामापुर पुलिस चौकी से अधिक दूरी पर नहीं है, बावजूद इसके अवैध गतिविधियों का संचालित होना स्थानीय पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते निगरानी की होती और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया होता, तो आज पंकज की जान नहीं जाती।

हादसे के बाद इलाके में गहरा आक्रोश व्याप्त है और पीड़ित परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए और इस अवैध खनन को संरक्षण देने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। लोगों का मानना है कि केवल खानापूर्ति करने या मशीनें जब्त करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे असली सिंडिकेट और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना अनिवार्य है।

घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान या ठोस कार्रवाई सामने न आने से लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है। क्षेत्रीय जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर किसके संरक्षण में यह मिट्टी का खेल चल रहा था और क्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को बेनकाब करेगा। फिलहाल पूरा इलाका इस सवाल का जवाब ढूंढ रहा है कि क्या अब किसी की जान जाने के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी या भविष्य में भी ऐसी ही लापरवाही जारी रहेगी।

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