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स्मार्ट मीटर पर सरकारी यू-टर्न जनता के संघर्ष की जीत, पर तकनीकी जांच अभी भी जरूरी: अब्दुल हफीज गांधी।

स्मार्ट मीटर पर सरकारी यू-टर्न जनता के संघर्ष की जीत, पर तकनीकी जांच अभी भी जरूरी: अब्दुल हफीज गांधी।

संवाददाता, जुम्मन कुरैशी 

गंजडुंडवारा (कासगंज): उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था को बदल कर पोस्टपेड करने और बकाया राशि को किस्तों में जमा करने की सुविधा देने के निर्णय को लेकर गंजडुंडवारा में जबरदस्त उत्साह देखा गया। मंगलवार को मोहल्ला खैरू लाल कुआं के पास समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अब्दुल हफीज गांधी ने आम जनता के बीच मिठाई बांटकर इस फैसले का स्वागत किया।

उन्होंने इसे जनता के लंबे संघर्ष, व्यापक जनदबाव और लोकतांत्रिक आंदोलनों की एक बड़ी जीत करार दिया। गांधी ने कहा कि सरकार का यह कदम उन लाखों करोड़ों परिवारों के लिए बड़ी राहत है जो प्रीपेड व्यवस्था के कारण अचानक बिजली कटने और बिलिंग की अनिश्चितताओं से मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान थे।

अब्दुल हफीज गांधी ने विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में उपभोक्ताओं की मुख्य शिकायत प्रीपेड मीटरों की कार्यप्रणाली को लेकर थी, जहां बिना किसी पूर्व सूचना के कनेक्शन काट दिया जाता था और भुगतान के घंटों बाद भी आपूर्ति बहाल नहीं होती थी। अब सरकार द्वारा पांच बार एसएमएस भेजने, एक माह तक कनेक्शन न काटने और बकाया भुगतान के लिए 10 किस्तों की सुविधा देना स्वागत योग्य है।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि संघर्ष अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है क्योंकि जनता की बुनियादी समस्या मीटरों की अत्यधिक तेज रीडिंग और उससे होने वाली ओवर बिलिंग है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जब तक इन स्मार्ट मीटरों की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष तकनीकी जांच नहीं कराई जाती, तब तक उपभोक्ताओं का संदेह दूर नहीं होगा।

सपा प्रवक्ता ने इस अवसर पर उन लोगों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जिन्होंने जनता की आवाज बुलंद करने के लिए धरना-प्रदर्शन किए थे। उन्होंने मांग की कि स्मार्ट मीटर के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने वाले नागरिकों और कार्यकर्ताओं पर दर्ज किए गए मुकदमे तथा एफआईआर तत्काल वापस लिए जाएं। उन्होंने याद दिलाया कि कासगंज के सुजावलपुर और एटा बिजली घरों पर हुए आंदोलनों ने ही सरकार को यह निर्णय लेने पर मजबूर किया है। अंत में उन्होंने दोहराया कि यह संघर्ष की केवल पहली जीत है और जब तक मीटरों की तकनीकी खामियां पूरी तरह दूर नहीं होतीं और आंदोलनकारियों को न्याय नहीं मिलता, तब तक जनता के हितों की यह लड़ाई जारी रहेगी।

 

 

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