Breaking News

बदायूँ में दवा माफ़ियाओं का दबदबा! निजी चिकित्सक ने खोला भ्रष्टाचार का राज़। 

बदायूँ में दवा माफ़ियाओं का दबदबा! निजी चिकित्सक ने खोला भ्रष्टाचार का राज़। 

बदायूँ। जनपद बदायूँ में दवा माफ़ियाओं और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कुछ लोगों की मिलीभगत का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। निजी चिकित्सक डॉ. सैय्यद मुदस्सिर अली ने आरोप लगाया है कि उन्हें फर्जी शिकायतों, धमकियों और लगातार दबाव के माध्यम से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। चिकित्सक का कहना है कि यह सब एक संगठित गिरोह के इशारे पर किया जा रहा है, जो डॉक्टरों को दवा कम्पनियों के हित में काम करने के लिए मजबूर करता है।

डॉ. अली ने इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री को शिकायत भेजते हुए निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

दवा कम्पनी का दबाव और धमकी।

डॉ. अली ने बताया कि अप्रैल माह के पहले सप्ताह में AZIDAN PHARMA कम्पनी से जुड़े कुछ लोग उनके क्लीनिक पर पहुंचे और कम्पनी की दवाइयाँ लिखने का दबाव बनाने लगे। आरोप है कि इसमें डॉ. सुबूर खान (आयुष चिकित्सक, CHC जगत, RBSK योजना), आसिफ़ हुसैन (जिला डाटा मैनेजर, आईडीएसपी), डॉ. दानिश अंसारी (निजी चिकित्सक) तथा अजमत अली खान (अजमत मेडिकल स्टोर संचालक) शामिल थे।

डॉ. अली का आरोप है कि इन लोगों ने साफ शब्दों में धमकी दी–

“अगर हमारी कम्पनी की दवा नहीं लिखी तो तुम्हें चैन से प्रैक्टिस नहीं करने देंगे।”

फर्जी शिकायतों का सिलसिला।

धमकी के कुछ दिन बाद ही, आरोपी पक्ष ने ‘सलीम’ नामक एक फर्जी व्यक्ति से उनके खिलाफ मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। जांच में यह खुलासा हुआ कि शिकायत में दर्ज मोबाइल नंबर वास्तव में आरोपी आसिफ़ के नाम पर है।

इसके बाद भी ये लोग नहीं रुके। हाल ही में एक तथाकथित पत्रकार, जो अक्सर CMO दफ्तर में सक्रिय रहता है, के माध्यम से भी डॉ. अली के खिलाफ शिकायत कराई गई और उन्हें सीएमओ ऑफिस से नोटिस भिजवाया गया। चिकित्सक का कहना है कि यह सब योजनाबद्ध षड्यंत्र के तहत हो रहा है, ताकि उन्हें दबाव में लाकर दवा कम्पनियों का कारोबार बढ़ाया जा सके।

मानसिक प्रताड़ना और सबूत।

डॉ. अली ने बताया कि इन झूठी शिकायतों से उनकी पेशेवर छवि धूमिल की जा रही है और उन्हें लगातार मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास पूरे मामले से जुड़े व्हाट्सऐप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और CCTV फुटेज मौजूद हैं, जो इस साज़िश का पर्दाफाश करने के लिए पर्याप्त हैं।

सीएमओ दफ्तर की भूमिका पर भी सवाल।

विश्वस्त सूत्रों ने खुलासा किया है कि इस पूरे प्रकरण में CMO कार्यालय की मिलीभगत भी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि वहां एक संगठित गिरोह सक्रिय है जिसमें कुछ अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। यह गिरोह न केवल झोलाछाप डॉक्टरों को संरक्षण देता है, बल्कि उनसे आर्थिक वसूली भी करता है। बदले में उन डॉक्टरों से कंपनियों की महँगी दवाइयाँ लिखवाई जाती हैं।

मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर चिकित्सक दवा माफ़ियाओं के दबाव में काम करने लगेंगे तो इसका सीधा असर मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ेगा। मरीजों को अनावश्यक महँगी दवाइयाँ खरीदनी पड़ेंगी और गरीब परिवार आर्थिक बोझ तले दब जाएंगे।

चिकित्सक की मांग – निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई।

डॉ. अली ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ भा.दं.सं., आईटी एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह की फर्जी शिकायतों को रोकने और चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाना ज़रूरी है।

मामला तूल पकड़ता नज़र आ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर चिकित्सकों को दवा माफ़ियाओं के दबाव में काम करना पड़ा तो इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सख्त कदम उठाने की मांग की है।

शिकायती प्रार्थना पत्र👇

025-09-11 19-01-04

Spread the love

Check Also

कासगंज: सोरों में जुआरियों पर पुलिस का शिकंजा, 1 लाख से अधिक की नकदी और 5 बाइक बरामद।

कासगंज: सोरों में जुआरियों पर पुलिस का शिकंजा, 1 लाख से अधिक की नकदी और …

error: Content is protected !!