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गंजडुंडवारा में तालाब किनारे दुकानों के निर्माण पर विवाद, ई-निविदा निरस्त करने की मांग।

गंजडुंडवारा में तालाब किनारे दुकानों के निर्माण पर विवाद, ई-निविदा निरस्त करने की मांग।

संवाददाता, वसीम कुरैशी 

गंजडुंडवारा, कासगंज। नगर पालिका परिषद द्वारा कादरगंज रोड स्थित तालाब के पास 41 दुकानों के निर्माण हेतु जारी की गई ई-निविदा को लेकर कस्बे में कानूनी और सामाजिक विवाद गहरा गया है। मोहल्ला धनपाल निवासी उदित कुमार विजय ने नगर पालिका अध्यक्ष हाजी मुनब्बर हुसैन और अधिशासी अधिकारी (ईओ) सुनील कुमार को एक विस्तृत आपत्ति पत्र सौंपकर इस पूरी निविदा प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित या निरस्त करने की मांग की है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि नगर पालिका द्वारा राज्य वित्त आयोग की धनराशि से करीब एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से जिस भूमि पर दुकानों का निर्माण प्रस्तावित किया गया है, वह राजस्व अभिलेखों के गाटा संख्या 766/0.533 हेक्टेयर में तालाब अथवा जलमग्न भूमि के रूप में दर्ज है, जिसके चलते इस भूमि पर किसी भी प्रकार का पक्का निर्माण पूरी तरह नियम विरुद्ध है। इस गंभीर मामले को लेकर क्षेत्र के कई सभासदों द्वारा पहले ही राजस्व परिषद लखनऊ को शिकायत भेजी जा चुकी है।

आपत्ति पत्र में इस बात को प्रमुखता से उठाया गया है कि खुद नगर पालिका द्वारा जारी विज्ञापन में ‘तालाब के पास’ शब्द का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि निर्माण स्थल सीधे तौर पर तालाब क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि यदि इस जलमग्न भूमि पर पक्का निर्माण कराया गया, तो क्षेत्र की प्राकृतिक जल निकासी पूरी तरह बाधित हो जाएगी, जिससे आने वाले वर्षा काल में पूरे कस्बे को भीषण जलभराव के संकट से जूझना पड़ेगा।

इसके साथ ही निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप है कि इस महत्वपूर्ण टेंडर का प्रकाशन ऐसे समाचार पत्रों में कराया गया जिनका कस्बे में नियमित वितरण ही नहीं होता, ताकि स्थानीय नागरिकों और संभावित आपत्तिकर्ताओं को इसकी समय पर भनक न लग सके। साथ ही, इतनी बड़ी परियोजना को हरी झंडी देने से पहले स्थानीय सभासदों या प्रभावित जनता के साथ कोई जनसुनवाई या औपचारिक चर्चा भी नहीं की गई।

शिकायतकर्ता ने जिला प्रशासन और नगर पालिका प्रबंधन से पुरजोर मांग की है कि जब तक किसी स्वतंत्र तकनीकी टीम द्वारा क्षेत्र के ड्रेनेज व जल निकासी का भौतिक परीक्षण नहीं कर लिया जाता और राजस्व विभाग द्वारा भूमि के स्वामित्व व श्रेणी का पूरी तरह सत्यापन नहीं हो जाता, तब तक इस प्रस्तावित निर्माण कार्य पर पूर्ण रूप से रोक लगाई जाए। फिलहाल, तालाब की भूमि पर व्यावसायिक दुकानों के निर्माण की इस योजना को लेकर स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं और जनता अब इस मामले पर उच्चाधिकारियों के अगले कदम का इंतजार कर रही है।

 

 

 

 

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