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चन्दौली: संतुलित पोषण और जैविक खेती से समृद्ध होंगे किसान, कृषि विज्ञान केंद्र में विशेषज्ञों ने साझा किए गुर।

चन्दौली: संतुलित पोषण और जैविक खेती से समृद्ध होंगे किसान, कृषि विज्ञान केंद्र में विशेषज्ञों ने साझा किए गुर।

संवाददाता: शैलेश सिंह

चन्दौली। जनपद के बबुरी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में बुधवार को किसानों की आय बढ़ाने और भूमि की सेहत सुधारने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज, अयोध्या और भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘संतुलित उर्वरक, उचित प्रबंधन और स्वस्थ मिट्टी’ रहा। अभियान के दौरान क्षेत्र के लगभग 65 प्रगतिशील महिला एवं पुरुष कृषकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के विशेषज्ञ डॉ. नीरज सिंह ने मृदा परीक्षण की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि वैज्ञानिक आधार पर उर्वरकों का चयन करने से न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि उत्पादन में भी वृद्धि होती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।

प्रशिक्षण के दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अभयदीप गौतम ने किसानों को प्राकृतिक और जैविक विधि से बीज उपचार के प्रभावी तरीकों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह कम लागत वाली विधि बीजों को शुरुआती रोगों से बचाकर उनकी अंकुरण क्षमता को बढ़ाती है, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है। वहीं, डॉ. सुदर्शन मौर्य ने मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों (माइक्रोब्स) की भूमिका को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि ये सूक्ष्मजीव फास्फोरस और पोटाश जैसे तत्वों को पौधों के लिए सुलभ बनाते हैं, जिससे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम की जा सकती है। इसी क्रम में डॉ. अमित कुमार सिंह ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न आयामों और ‘घनजीवामृत’ जैसी जैविक खादों के निर्माण व प्रयोग पर किसानों से विस्तार से चर्चा की।

जैव एजेंट्स के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए डॉ. ए.एन. त्रिपाठी ने बताया कि ट्राइकोडर्मा और पीएसबी जैसे लाभकारी तत्व फसलों को बीमारियों से बचाते हुए पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय में वृद्धि करने में सहायक हैं। मृदा वैज्ञानिक डॉ. चंदन सिंह ने मिट्टी की जाँच की प्रक्रिया और उसके सही समय के बारे में जानकारी दी, जबकि उद्यान वैज्ञानिक मनीष सिंह ने फलदार वृक्षों में जीवामृत के सफल प्रयोग के तरीके सिखाए। इसके अतिरिक्त, डॉ. प्रतीक सिंह ने पशुपालकों को बढ़ते तापमान और लू के प्रकोप से जानवरों को बचाने के उपाय साझा किए। कार्यक्रम के अंत में वैज्ञानिकों ने किसानों की विभिन्न शंकाओं का समाधान किया और उन्हें टिकाऊ खेती के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।

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