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बिसौली: मोहर्रम का चांद होते ही शुरू हुआ गम-ए-हुसैन का माहौल, पहला अलम जुलूस निकाला गया।

बिसौली: मोहर्रम का चांद होते ही शुरू हुआ गम-ए-हुसैन का माहौल, पहला अलम जुलूस निकाला गया।

आई एम खान 

बिसौली (बदायूं)। मोहर्रम का चांद दिखाई देने और उसकी शरई तस्दीक के साथ ही इस्लामी नए साल 1448 हिजरी का आगाज़ हो गया है। इस मुकद्दस ऐलान के साथ ही अकीदतमंदों के बीच कर्बला के शहीदों की याद में गम-ए-हुसैन और अजादारी का सिलसिला शुरू हो गया है।

बुधवार को मोहर्रम के पहले दिन नगर में पूरी अकीदत और एहतराम के साथ पहला अलम जुलूस निकाला गया। यह जुलूस ‘अंजुमन फरौगे अजा’ की कयादत में कर्बला के 72 शहीदों की शहादत की याद में आयोजित किया गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शामिल होकर हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी को नमन किया।

इस दौरान अंजुमन फरौगे अजा के सदर मो. रजा और मुतावल्ली अब्बास रजा समेत संस्था के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। जुलूस के दौरान फिरोज़ अब्बास, जाफर रिज़वी, गुलरैज अब्बास, जमाल इकबाल, अफरोज अब्बास, मो. वसीम, अता हुसैन, दिलशाद हुसैन, अज़हर अब्बास, इज्ज़त अली, मुन्तजिर मेहंदी, तनवीर इकबाल, इमरान अली, साजिद अब्बास, जिया अब्बास और हसन इकबाल समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। जुलूस के दौरान फिजा गमगीन रही और हर तरफ कर्बला की शहादत की चर्चा रही।

 

 

 

 

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